
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज अपने सत्संग, प्रवचनों और भजनों के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक राह दिखाने के लिए जाने जाते हैं। उनके द्वारा कहे गए विचार न केवल प्रेरणादायक होते हैं, बल्कि जीवन में दिशा देने वाले भी होते हैं। राधारानी के अनन्य भक्त माने जाने वाले महाराज जी के अनुयायियों की संख्या देश ही नहीं, विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है।
हाल ही में एक सत्संग के दौरान प्रेमानंद महाराज ने मानव जीवन में छिपे छह ऐसे दोषों का जिक्र किया, जो व्यक्ति को भीतर से खोखला कर देते हैं और अंततः उसे पतन की ओर धकेल देते हैं। उन्होंने न केवल इन दोषों की पहचान करवाई, बल्कि इन्हें दूर करने का उपाय भी बताया।
ये हैं वह 6 आदतें जो इंसान को कर देती हैं बर्बाद
प्रेमानंद महाराज ने एक श्रद्धालु के सवाल का उत्तर देते हुए बताया कि मन की वासनाएं और इच्छाओं का असंतुलन व्यक्ति को बर्बादी के रास्ते पर ले जाता है। उन्होंने कहा कि हर इंसान के भीतर कुछ मूल दोष होते हैं, जो यदि नियंत्रण में न रहें तो उसका जीवन दुख, तनाव और असफलताओं से भर जाता है।
इन 6 मुख्य दोषों को उन्होंने इस प्रकार समझाया:
क्रोध – जब गुस्सा इंसान पर हावी हो जाता है, तो उसकी सोचने-समझने की क्षमता खत्म हो जाती है।
लोभ – जब व्यक्ति जरूरत से अधिक पाने की इच्छा रखता है, तो उसका संतुलन बिगड़ जाता है।
काम (वासना) – वासनाओं में फंसा मन कभी भी स्थिर नहीं रह पाता, जिससे जीवन में अशांति आती है।
मोह – अत्यधिक लगाव और आसक्ति व्यक्ति को आत्मिक विकास से रोकती है।
मद (अहंकार) – स्वयं को सबसे श्रेष्ठ मानने की भावना संबंधों और आध्यात्मिक उन्नति दोनों को प्रभावित करती है।
मत्सर (ईर्ष्या) – दूसरों की प्रगति को देखकर जलन महसूस करना आत्मा की शुद्धि को नष्ट कर देता है।
प्रेमानंद महाराज ने विशेष रूप से ईर्ष्या पर जोर देते हुए कहा कि यह एक ऐसा विष है, जो धीरे-धीरे आत्मा को खोखला कर देता है। जब कोई अपने से आगे बढ़ता दिखता है, तो हम उसे देखकर जलने लगते हैं — और यही हमारा पतन शुरू कर देता है।
इन दोषों से मुक्ति का रास्ता क्या है?
इन दुर्गुणों से छुटकारा पाने का उपाय भी प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट रूप से बताया। उनका कहना है कि जब तक व्यक्ति सत्संग, भजन और प्रभु के नाम का जाप नहीं करेगा, तब तक ये दोष उसका पीछा नहीं छोड़ेंगे। आध्यात्मिक अभ्यास ही वह मार्ग है जो व्यक्ति को इन मानसिक विकारों से निकालकर शांति और संतुलन की ओर ले जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि रोज़ थोड़ी देर भजन करना, ईश्वर का स्मरण करना और सत्संग में भाग लेना — ये छोटे-छोटे कदम मन को स्थिर बनाते हैं और आत्मा को बल देते हैं। खासकर नाम-स्मरण (नाम-जप) को उन्होंने सबसे शक्तिशाली उपाय बताया।
अंत में प्रेमानंद महाराज का संदेश
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि इंसान यदि अपने भीतर छिपे दोषों को पहचान ले और उन्हें सुधारने की कोशिश करे, तो उसका जीवन न केवल सफल हो सकता है, बल्कि आत्मिक शांति और आनंद से भी भर सकता है।
उनका संदेश साफ है — "अपने भीतर झांको, दोषों को पहचानो और भजन-सुमिरन से उन्हें दूर भगाओ।"














