
आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व सोमवार, 22 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 1 अक्टूबर को समाप्त होगा। वहीं, 2 अक्टूबर को विजयदशमी का पर्व और मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।
नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है और यह पूरे 9 दिनों तक धूमधाम के साथ मनाया जाता है। साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं, लेकिन आश्विन माह की शारदीय नवरात्रि पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस दौरान मां दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। नवदिवसीय व्रत का पालन करने वाले भक्त कई नियमों का ध्यान रखते हैं।
यदि आप पहली बार नवरात्रि व्रत रख रहे हैं या इसे अपनाने का सोच रहे हैं, तो व्रत से जुड़े नियम जानना बेहद जरूरी है। व्रत के दौरान किसी भी नियम की अनदेखी से व्रत अधूरा या खंडित हो सकता है।
# नवरात्रि व्रत में क्या करें (What to do on Navratri Fasting)
सफाई और तैयारी: व्रत शुरू होने से पहले घर और पूजा स्थल की पूरी सफाई कर लें।
पूजा सामग्री: नौ दिनों की पूजा सामग्री पहले ही जुटा लें और हो सके तो नए वस्त्रों का प्रयोग करें।
संकल्प लेना: पहले दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
कलश स्थापना: कलश में जल, सुपारी, दूर्वा और फूल रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें।
अखंड ज्योति: पूरे 9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लें, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मंत्र और आरती: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करें और सुबह-शाम मंत्र जाप व आरती करें।
सात्विक भोजन: व्रत के दौरान केवल सात्विक आहार लें। कुट्टू और सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, फल और जूस शामिल कर सकते हैं। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करें।
# नवरात्रि व्रत में क्या न करें (What not to do during Navratri fast)
तामसिक भोजन: मांसाहारी भोजन, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से न करें।
विषाक्त आदतें: सिगरेट, शराब और तंबाकू का प्रयोग न करें।
व्यक्तिगत देखभाल: बाल, दाढ़ी और नाखून व्रत के दौरान न काटें।
अनाज और दाल: नौ दिनों तक दाल या अनाज का सेवन वर्जित है।
# नवरात्रि व्रत का महत्व (Importance of Navratri Fasting)
नवरात्रि व्रत से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं हैं। 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा होती है। इसलिए भक्त हर दिन अलग रूप की आराधना करते हैं। शास्त्रों के अनुसार व्रत या उपवास मन और आत्मा को पवित्र करता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और साधना में एकाग्रता बढ़ती है। सात्विक भोजन लेने से शरीर की शुद्धि होती है, पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर का डिटॉक्स व रिबूट होता है। नवरात्रि व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।














