जगन्नाथ रथ यात्रा के सबसे पवित्र और प्रमुख अनुष्ठानों में शामिल 'अडापा बिजे' की रस्म पूरे विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हो गई। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को उनके रथों से पारंपरिक 'पहंडी' (पाहंडी) जुलूस के माध्यम से गुंडिचा मंदिर स्थित अडापा मंडप तक पहुंचाया गया। अब महाप्रभु अगले नौ दिनों तक यहीं विराजमान रहेंगे और श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा, चिकित्सा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए ताकि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में रहेंगे महाप्रभु
जगन्नाथ मंदिर के प्रतिहारी सेवायत नरसिंह प्रतिकार ने बताया कि अडापा बिजे रथ यात्रा का बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इस अनुष्ठान के तहत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने जन्मस्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर में विराजमान होते हैं। रथ यात्रा के दिन से शुरू होकर वे यहां नौ दिनों तक निवास करते हैं। इसके बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं।
उन्होंने कहा कि महाप्रभु की सेवा का अवसर मिलना अत्यंत सौभाग्य की बात है। अडापा बिजे से पहले रथों से घोड़ों को हटाया जाता है और नारियल के पेड़ों से तैयार किए गए विशेष चारमाल लगाए जाते हैं। इन्हीं चारमाल के सहारे भगवान को पारंपरिक पहंडी शैली में अडापा मंडप तक ले जाकर रत्न सिंहासन पर विराजमान कराया जाता है।
जानिए अडापा बिजे अनुष्ठान की पूरी प्रक्रिया
नरसिंह प्रतिकार ने बताया कि इस धार्मिक परंपरा को संपन्न कराने में विभिन्न सेवायतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भगवान के पीछे चलने वाले सेवक, भुजाओं को सहारा देने वाले दैतापति सेवायत और पूरी प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने वाले प्रतिहारी सेवायत मिलकर इस दिव्य अनुष्ठान को संपन्न कराते हैं। यही कारण है कि सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ निभाई जाती है।
वहीं, अजय महापात्रा ने बताया कि सुबह से ही रथों पर भगवान की सभी पारंपरिक नीतियां और सेवाएं संपन्न की जाती हैं। इनमें मंगला आरती, अवकाश, गोपाल वल्लभ, सकाल धूप, चंदन लागी, महास्नान, मध्याह्न धूप और संध्या आरती जैसे प्रमुख अनुष्ठान शामिल होते हैं। संध्या आरती के बाद रथों से घोड़ों को हटाकर चारमाल लगाए जाते हैं। इसके बाद पुष्पांजलि अर्पित की जाती है और भगवान की पहंडी यात्रा प्रारंभ होती है। अंत में महाप्रभु को गुंडिचा मंदिर के अडापा मंडप में विराजमान कराया जाता है, जहां अगले दिन से श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकते हैं।
सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
अडापा बिजे के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। पुलिस अधिकारी प्रतीक गीता सिंह ने बताया कि पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), अग्निशमन विभाग और चिकित्सा टीमों की भी तैनाती की गई थी। पूरे क्षेत्र में प्रभावी भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष सुरक्षा घेरा बनाया गया, जिसके बीच महाप्रभु को सुरक्षित रूप से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया गया। प्रशासन ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक आयोजन का सुचारु संचालन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही।













