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  • राजीव गांधी की नहीं थी राजनीति में रुचि लेकिन वक्त को कुछ और था मंजूर, बना दिया PM

राजीव गांधी की नहीं थी राजनीति में रुचि लेकिन वक्त को कुछ और था मंजूर, बना दिया PM

By: Pinki Tue, 20 Aug 2019 10:17 AM

राजीव गांधी की नहीं थी राजनीति में रुचि लेकिन वक्त को कुछ और था मंजूर, बना दिया PM

आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की 75वीं जयंती है। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 में मुंबई में हुआ। जब भारत को अंग्रेजी शासन की गुलामी से आजादी मिली तो उनकी उम्र महज तीन साल थी। देश आज़ाद हुआ और राजीव गांधी के नाना यानी जवाहर लाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी ने देहरादून के प्रतिष्ठित दून स्कूल से पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में एडमिशन लिया और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग का कोर्स किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने कमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल किया और इंडियन एयरलाइंस में बतौर पायलट काम करने लगे। राजीव गांधी को भारत में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन क्रांति का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने इकनॉमी के उदारीकरण और सरकारी नौकरशाही में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए। साल 1965 में राजीव गांधी की मुलाकात इटली में सोनिया गांधी से हुई और बाद में दोनों ने शादी कर ली।

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राजीव गांधी की रुचि राजनीति में कभी नहीं रही। लेकिन वक्त को क्या मंजूर होता है इसका किसी को नहीं पता। 980 में संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई तो अचानक से राजीव गांधी के लिए भी परिस्थियां बदल गई। कांग्रेस के नेता और अन्य लोगों द्वारा उनपर राजनीति में प्रवेश करने और अपनी मां इंदिरा गांधी का सहयोग करने का दबाव बनने लगा। आखिरकार उन्हें राजनीति में आना पड़ा और संजय गांधी की मृत्यु से खाली हुए उत्तर प्रदेश के अमेठी संसदीय क्षेत्र से राजीव गांधी ने पहली बार उपचुनाव लड़ा। उन्हें 258,884 वोट मिले थे। इस सीट पर संजय गांधी की मृत्यु के बाद उपचुनाव हुए थे। इसी महीने वे युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मेंबर भी बन गए।

राजीव गांधी को उस वक्त यह मालूम भी नहीं था कि आने वाला वक्त राजनीति में उनकी कैसी परीक्षा लेने वाला है। 31 अक्टूबर 1984 ये वो दिन था, जब भारतीय राजनीति में वो हुआ, जो शायद किसी ने सोचा नहीं होगा। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इंदिरा गांधी के दो सिख बॉडीगार्ड्स ने उनकी हत्या कर दी। जब यह हादसा हुआ, जब राजीव गांधी कोलकाता में थे। उनकी मां की हत्या के कुछ ही घंटों बाद सरदार बूटा सिह और तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने उनसे प्रधानमंत्री बनने को कहा। पद संभालने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति से संसद भंग कर दोबारा चुनाव कराने को कहा। राजीव गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने और चुनावों में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। तब कांग्रेस को 414 सीटें मिली थीं। 40 साल की उम्र में 31 दिसंबर 1984 को राजीव गांधी भारत के सबसे युवा पीएम बने।

यह वक्त उनके लिए व्यक्तिगत रूप से काफी दुखद रहा लेकिन उन्होंने संतुलन, मर्यादा और संयम के साथ राष्ट्रीय जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वहन किया।

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बता दे, राजीव गांधी के जन्मदिवस के मौके पर देश भर में कांग्रेस पार्टी के द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को विट्ठल भाई पटेल हाउस में कांग्रेसियों द्वारा कार्यक्रमों की चर्चा की गई। वैसे तो राजीव गंधी की जन्मदिन 20 अगस्त को पड़ता है। लेकिन, कांग्रेस 22 अगस्त को इंदिरा गांधी स्टेडियम में उनका जन्मोत्सव मनाएगी।

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