गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) पर इस बार 'महाराष्ट्र के लालबागचा राजा' गणेश पंडाल में चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) थीम वाली गणेश मूर्ति सबसे ज्यादा चर्चा में रही। लालबाग के राजा की मूर्ति के चारों तरफ एस्ट्रोनॉट घूमते दिखाई दे रहे हैं। लालबाग के राजा के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से मुंबई पहुंचते हैं। माना जाता है कि लालबाग के राजा के चरण का सिंदूर हर कामना को पूरा करता है। इसलिए भक्त लालबाग के राजा के चरण से सिंदूर लेना चाहते हैं। इस बार गणेश चतुर्थी पर हैदराबाद भी पीछे नहीं है।
हैदराबाद के खैराताबाद में 61 फीट ऊंची और करीब 50 टन वजनी गणेश मूर्ति के लिए सुबह 7 बजे से ही कड़ी सुरक्षा का इंतजाम किया गया है। मुंबई में लाल बाग के राजा की मूर्ति की तरह ही हैदराबाद में इस मूर्ति के दर्शन को जनसैलाब उमड़ रहा है। इस मूर्ति को बनाने में तकरीबन एक करोड़ रुपये की लागत आई है। श्रीगणेश की इस मूर्ति को हुस्सैन सागर झील में विसर्जित किया जाएगा।
इस विशालकाय मूर्ति को विसर्जन घाट तक ले जाने के लिए 26 टायरों वाले ट्रक का इंतजाम किया गया है। सुरक्षाकर्मियों की कोशिश है कि मूर्ति को दोपहर तक सही सलामत विसर्जित किया जा सके।
बता दें कि इस साल यहां भगवान गणेश को 750 किलोग्राम का लड्डू भी चढ़ाया गया था। इस लड्डू को प्रसाद के रूप में आज ही बांटा जाएगा।














