
भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए टैरिफ का संकट फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की जो घोषणा की थी, उसे लागू करने की तारीख अब आगे बढ़ा दी गई है। पहले यह शुल्क 1 अगस्त 2025 से प्रभावी होने वाला था, लेकिन अब इसे एक हफ्ते के लिए टालते हुए 7 अगस्त 2025 कर दिया गया है।
व्हाइट हाउस की ओर से इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया गया कि यह राहत केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि 96 देशों को इस फैसले का लाभ मिला है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जिन देशों पर टैरिफ तय किया था, उनमें भारत के अलावा पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत और अफगानिस्तान पर 15 प्रतिशत शुल्क शामिल हैं। हालांकि, फिलहाल इन सभी देशों को अस्थायी राहत मिल गई है।
ट्रंप की रणनीति: आर्थिक लाभ और दबाव की राजनीति
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ये नए टैरिफ अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान करेंगे और वैश्विक व्यापार संतुलन को दुरुस्त करने में मददगार साबित होंगे। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले अमेरिका की विदेश नीति में दबाव की रणनीति का हिस्सा हैं, खासकर उन देशों के लिए जिनसे अमेरिका व्यापारिक सौदे करना चाहता है।
भारत पर विशेष दबाव बनाने की कोशिश
भारत के लिए यह फैसला अमेरिकी दबाव की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत उसके साथ व्यापारिक समझौतों में अधिक लचीलापन दिखाए। अब तक दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन ट्रेड डील अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी है।
इस संदर्भ में अमेरिका के विदेश विभाग में दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की पूर्व सहायक मंत्री निशा बिस्वाल ने भी यह टिप्पणी की थी कि अमेरिका द्वारा टैरिफ लागू करना एक सोचा-समझा कूटनीतिक दांव है। उनका कहना था कि इस तरह के फैसलों के जरिए अमेरिका, भारत जैसे देशों पर अपने हितों के अनुरूप समझौता करने का दबाव बनाना चाहता है।
ट्रेड डील में कहां है अड़चन
अमेरिका की प्रमुख मांग यह है कि भारत कृषि और डेयरी क्षेत्र में बाजार खोले, लेकिन भारत ने इसे लेकर असहमति जताई है। भारत का स्पष्ट रुख है कि वह इन क्षेत्रों को अमेरिका के लिए नहीं खोलेगा। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि अमेरिका अपने डेयरी उत्पादों, विशेष रूप से मिल्क पाउडर, को भारत भेजना चाहता है। लेकिन अमेरिका में दूध देने वाले पशुओं को जिस तरह का चारा दिया जाता है, जिसमें सूअर और अन्य जानवरों की चर्बी का प्रयोग होता है, वह भारत में स्वीकार्य नहीं है।
भारत का मानना है कि व्यापार समझौता ऐसा होना चाहिए जो न केवल दोनों देशों के लिए उचित हो, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के धार्मिक और स्वास्थ्य मानकों का भी ध्यान रखे। भारत संतुलित और पारदर्शी व्यापारिक समझौते की मांग कर रहा है, जिससे घरेलू उद्योगों और उपभोक्ताओं को कोई नुकसान न हो।














