अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ अपना रुख एक बार फिर कड़ा कर दिया है। ट्रंप ने ईरान से मध्य पूर्व में हुई मौतों और नुकसान के लिए मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लेबनान, सीरिया, यमन और गाजा में लोगों की मौत और तबाही के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ईरान के साथ होने वाली बातचीत में मुआवजे का मुद्दा प्रमुख शर्तों में शामिल रहेगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि ईरान अब मुआवजे की मांग कर रहा है, लेकिन इससे पहले तेहरान की ओर से हुई किसी बातचीत या बैठक में इस मुद्दे का उल्लेख नहीं किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि अमेरिका भी ईरान से उन लोगों की मौत और गंभीर रूप से घायल होने के लिए मुआवजा मांग रहा है, जिन्हें उनके मुताबिक तेहरान से जुड़े संघर्षों में नुकसान पहुंचा।
ट्रंप ने किन लोगों के लिए मुआवजे की बात कही?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में यूएसएस कोल पर मारे गए लोगों के परिवारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुआवजे की मांग केवल हालिया घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों के मामलों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए, जो विभिन्न लड़ाइयों में मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
ट्रंप ने ईरान में पिछले 50 वर्षों के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों के लिए भी मुआवजे की मांग की। इसके अलावा उन्होंने पिछले पांच महीनों में मारे गए 52,000 लोगों के लिए भी मुआवजे की बात कही। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में ईरान के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में इस मांग को शामिल किया जाए।
समझौते से पहले मुआवजे की शर्त
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के मुद्दे पर अमेरिका से मुआवजे की मांग की गई थी। इसके जवाब में ट्रंप ने भी ईरान से पिछली घटनाओं और गलतियों के लिए मुआवजे की मांग को बातचीत की शर्त के तौर पर सामने रखा है।
इस तरह दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत में मुआवजे का मुद्दा एक अहम विषय बन गया है। ट्रंप के रुख से साफ है कि वह ईरान के साथ किसी भी भविष्य की बातचीत में पुराने विवादों और उनसे हुए नुकसान का हिसाब शामिल करना चाहते हैं।
ईरान ने सुरक्षा और सैन्य तैयारियों पर भी जताया जोर
वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने देश की सुरक्षा और सैन्य तैयारियों से जुड़े कुछ प्रमुख उद्देश्यों का उल्लेख किया है। उनके बताए लक्ष्यों में ईरान की सेना और बासिज की डिफेंसिव सिक्योरिटी क्षमता तथा तैयारियों को मजबूत करना शामिल है।
इसके साथ ही ईरान के खिलाफ किसी भी स्तर या किसी भी प्रकार के पारंपरिक अथवा आधुनिक खतरे की स्थिति में समय पर और प्रभावी जवाब देने की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इन उद्देश्यों के तहत देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की बात कही गई है।
सैन्य कमान के एकीकरण पर भी जोर
अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई की ओर से बताए गए उद्देश्यों में ईरान की सैन्य कमान से जुड़ी व्यवस्थाओं के एकीकरण को पूरा करना भी शामिल है। इसमें आर्म्ड फोर्सेज के जनरल स्टाफ और खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के इंटीग्रेशन को पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।
ईरान की ओर से सुरक्षा और सैन्य क्षमता को मजबूत करने की बात और अमेरिका की ओर से मुआवजे की मांग के बीच दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ऐसे में भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत में मुआवजा, सुरक्षा और क्षेत्रीय घटनाओं से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।












