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कर्नाटक में वोटर लिस्ट पर बड़ा सवाल, 198 मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की कोशिश के आरोप में BJP नेता पर FIR

कर्नाटक SIR में Form-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों पर कई FIR दर्ज हुई हैं। बेलगावी में 198 मुस्लिम वोटरों का मामला भी शामिल है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 03 Oct 2026 11:28:50

कर्नाटक में वोटर लिस्ट पर बड़ा सवाल, 198 मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की कोशिश के आरोप में BJP नेता पर FIR

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान Form-7 के इस्तेमाल को लेकर विवाद बढ़ गया है। राज्य के कई इलाकों में आरोप लगे हैं कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए गए। बेलगावी में बीजेपी नेता रवि बी. पाटिल और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश के मामले में FIR दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, यह मामला 30 सितंबर को बेलगावी मार्केट पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ और जांच जारी है।

शिकायतकर्ता मीरासब सनादी बेलगावी नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 में बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट हैं। शिकायत के मुताबिक, 22 सितंबर को SIR प्रक्रिया के दौरान जब BLO की मदद का काम चल रहा था, तभी रवि पाटिल, शंकर बीरप्पा नाइक, प्रशांत दीपक मुंडिनमनी और कुछ अन्य लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाते हुए Form-7 के आवेदन जमा करने की कोशिश की। मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

बीदर में 3,244 वोटरों के नाम को लेकर शिकायत

बीदर जिले के भालकी में भी Form-7 के जरिए मतदाता सूची में नाम हटाने से जुड़ी शिकायत सामने आई है। 40 वर्षीय कारोबारी और मतदाता मोहम्मद अतीक अहमद ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान उन्हें और 3,244 अन्य मतदाताओं को गलत तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित या अनुपस्थित बताया गया।

शिकायत के बाद 1 अक्टूबर को 32 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। शिकायत में आरोप है कि प्रभावित मतदाताओं से सत्यापित दस्तावेज लिए बिना Form-7 आवेदन जमा किए गए और मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए गलत जानकारी तथा कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों की भी जांच की जा रही है।

मैसूरु में परिवार के नाम हटाने का आरोप

मैसूरु में सामाजिक कार्यकर्ता सैयद हसरत उल्ला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि उनके, उनके परिवार के सदस्यों और मुस्लिम समुदाय के कुछ अन्य लोगों के नाम हटाने के लिए Form-7 आवेदन जमा किए गए।

शिकायत में कहा गया कि इन आवेदनों में संबंधित लोगों को उनके पते पर नहीं रहने वाला बताया गया, जबकि शिकायतकर्ता के मुताबिक वह और उनके परिवार के सदस्य कई वर्षों से उसी पते पर रह रहे हैं। इस मामले में नरसिम्हाराजा पुलिस स्टेशन में हरीश कुमार सी, राघवेंद्र एम और बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे से जुड़े अनिल थॉमस समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।

बल्लारी में 7,561 Form-7 आवेदन का दावा

बल्लारी में भी मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए Form-7 के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। वार्ड नंबर 23 के कांग्रेस बूथ लेवल एजेंट गौतम एस की शिकायत पर 1 अक्टूबर को ब्रूसपेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।

शिकायत में बीजेपी बूथ लेवल एजेंट और बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद श्रीनिवास मोटकर समेत कुछ अधिकारियों और अन्य लोगों पर आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए 7,561 Form-7 आवेदन जमा किए गए। इस मामले में भी पुलिस आरोपों की जांच कर रही है।

दक्षिण कन्नड़ में 279 आवेदन, 82 मुस्लिम वोटरों से जुड़े होने का दावा

दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्थंगडी विधानसभा क्षेत्र में भी Form-7 को लेकर शिकायत सामने आई है। कांग्रेस नेता रक्षित शिवराम ने दावा किया कि 16 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए 279 Form-7 आवेदन जमा किए गए।

उनके अनुसार, उजिरे इलाके में इनमें से 82 आवेदन मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस मामले में उस समय तक FIR दर्ज नहीं हुई थी। इसलिए इस मामले से जुड़े आंकड़े और आरोप फिलहाल शिकायत और दावे के स्तर पर हैं।

तनवीर सैत ने भी लगाया आरोप

कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने भी अपने नरसिम्हाराजा विधानसभा क्षेत्र में Form-7 के इस्तेमाल को लेकर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि करीब 10,000 मुस्लिम और दलित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन जमा किए गए।

इस दावे को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है जिसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए Form-7 के कथित गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं। किसी आरोप को सही या गलत साबित करना जांच का विषय है।

Form-7 क्या है और विवाद किस बात पर है?

Form-7 मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या किसी मौजूदा नाम को हटाने का अनुरोध करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जा सकता है जहां मतदाता की मृत्यु हो चुकी हो, वह दूसरी जगह स्थानांतरित हो गया हो या उसका नाम एक से अधिक जगह दर्ज होने जैसी स्थिति हो।

कर्नाटक में विवाद इस बात को लेकर है कि क्या इस प्रक्रिया का इस्तेमाल गलत जानकारी के आधार पर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया गया। विभिन्न जिलों से आई शिकायतों में Form-7 आवेदन जमा करने के तरीके, उनमें दी गई जानकारी और संबंधित मतदाताओं की जानकारी के बिना आवेदन किए जाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

चुनाव अधिकारियों के स्तर पर भी इन शिकायतों की जांच की जा रही है। ऐसे मामलों में केवल Form-7 आवेदन जमा हो जाना अपने आप में मतदाता का नाम हटाए जाने का प्रमाण नहीं है। नाम हटाने की प्रक्रिया में संबंधित दावे और आपत्तियों की जांच महत्वपूर्ण होती है।

FIR दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है

बेलगावी, बीदर और मैसूरु में दर्ज FIR तथा बल्लारी से सामने आई शिकायतों ने SIR के दौरान Form-7 के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, FIR में दर्ज आरोप अपने आप में संबंधित व्यक्तियों को दोषी साबित नहीं करते।

बेलगावी मामले में 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश, बीदर में 3,244 मतदाताओं को कथित तौर पर स्थानांतरित या अनुपस्थित दिखाने का मामला और बल्लारी में 7,561 Form-7 आवेदन का आरोप अलग-अलग शिकायतों से जुड़े हैं। इन सभी मामलों में पुलिस और संबंधित चुनाव अधिकारी दस्तावेजों तथा आवेदन की प्रक्रिया की जांच कर रहे हैं।

अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होना बाकी है कि आवेदन किसने जमा किए, उनमें दी गई जानकारी कितनी सही थी, क्या किसी दस्तावेज या हस्ताक्षर में गड़बड़ी हुई और क्या इन आवेदनों के आधार पर वास्तव में किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया गया।

इसलिए फिलहाल कर्नाटक में सामने आए इन मामलों को आरोप, शिकायत और जांच के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित मामलों में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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