
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव अब सीमा संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक खुला युद्ध बनता जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने काबुल और कंधार में हवाई हमले किए, जिसमें 15 से अधिक अफगान नागरिकों की मौत हो गई और सौ से ज्यादा घायल हो गए। इस हमले से पहले तालिबान ने स्पिन बोल्दाक क्षेत्र में पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया था और वहां से पाकिस्तानी सैनिकों की वर्दियां, हथियार और पैंट जब्त किए गए थे। इन खाली पैंटों को अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया, जो अब इस संघर्ष का प्रतीक बन गए हैं।
यह अब सिर्फ सीमा विवाद नहीं, युद्ध है – अफगान जनता का ऐलान
बीबीसी के अफगान पत्रकार दाऊद जुनबिश ने पूर्वी नंगरहार प्रांत की एक तस्वीर साझा की, जिसमें तालिबान लड़ाके पाकिस्तानी सैनिकों की पैंट और हथियार प्रदर्शित कर रहे हैं। जुनबिश ने लिखा, "ड्यूरंड लाइन के पास स्थित छोड़ी गई पाकिस्तानी सेना की चौकियों से जब्त की गई खाली पैंट अब अफगान ज़मीन पर तालिबान के हाथों में हैं।"
इस घटना ने अफगान जनता को झकझोर दिया है। कंधार के निवासी मोहिबुल्लाह ने स्थानीय मीडिया से कहा, "अगर जरूरत पड़ी, तो हम भी मुजाहिदीन और इस्लामिक अमीरात की सेना के साथ लड़ाई में शामिल होंगे।" पक्तिया के निवासी बैतुल्लाह ने कहा, "इस्लामिक अमीरात ने पाकिस्तान को सही जवाब दिया है, और पूरे देश की जनता उनके साथ खड़ी है।"
पाकिस्तानी दावे और अफगानी पलटवार – आंकड़ों की जंग
इस संघर्ष की शुरुआत उस समय हुई जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हमले किए। यह हमला उस समय हुआ जब तालिबानी शासन के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत की यात्रा पर थे। अफगानों का कहना है कि पाकिस्तान ने बार-बार अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया।
इस बीच पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने 200 से ज्यादा तालिबान और उनके समर्थक लड़ाकों को मार गिराया, जबकि अफगानिस्तान का कहना है कि उसने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया है और 20 चौकियों को तबाह किया है।
तालिबान का वीडियो वायरल – पाक टैंक पर कब्जा, सैनिकों की वर्दियां हाथ में
तालिबान के लड़ाकों द्वारा जब्त पाकिस्तानी T-55 टैंक पर घूमते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। इसके साथ ही पाकिस्तानी सैनिकों की पैंट और वर्दियों को विभिन्न इलाकों में सार्वजनिक रूप से लहराते हुए भी तालिबानी दिखाई दिए। यह न केवल एक प्रतीकात्मक संदेश है, बल्कि अफगान जनता के आक्रोश और एकजुटता को भी दर्शाता है।
ड्यूरंड रेखा – ऐतिहासिक विवाद जो आज भी ज़ख्म दे रहा है
ड्यूरंड लाइन, जो कि ब्रिटिश शासन द्वारा खींची गई सीमा रेखा है, अफगान-पाक संबंधों की सबसे बड़ी ऐतिहासिक दरारों में से एक रही है। इस रेखा ने पश्तूनों की पारंपरिक भूमि को दो हिस्सों में बांट दिया, जिसे आज भी न तो अफगानी जनता स्वीकार करती है और न ही तालिबान शासन।
बीते सप्ताहांत, इसी रेखा के आसपास कम से कम सात स्थानों पर भीषण गोलीबारी हुई। दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे पर भारी क्षति पहुँचाने के दावे किए।
48 घंटे की संघर्षविराम की कोशिश – लेकिन तनाव कम नहीं
बुधवार की शाम को दोनों पक्षों ने 48 घंटे के संघर्षविराम पर सहमति जताई, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। पाकिस्तान ने कतर और सऊदी अरब से मध्यस्थता की गुहार लगाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा, "खुदा के लिए, अफगानों को युद्ध से रोकिए।"
लेकिन अफगान जनता और तालिबान स्पष्ट कर चुके हैं कि वे पीछे नहीं हटेंगे। काबुल की निवासी फरिश्ता ने कहा, "हम अपनी जमीन की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों के साथ हैं। हम उन्हें हर संभव सहयोग देंगे।"
संघर्ष की आग अभी बुझी नहीं
भले ही 48 घंटे की अस्थायी शांति का ऐलान हुआ हो, लेकिन सीमा पर चल रही यह लड़ाई एक लंबी और गंभीर टकराव का संकेत दे रही है। अफगान जनता तालिबान के साथ खड़ी हो चुकी है, और पाकिस्तान इस बार न सिर्फ सैन्य चुनौती बल्कि जन आक्रोश का भी सामना कर रहा है।
अब सवाल यह है – क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा, या एक व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले लेगा? जवाब शायद आने वाले कुछ दिनों में खुद ही सामने आ जाएगा।














