
पाकिस्तान के अंदर बढ़ती असंतोष की लहर ने अब पाकिस्तान-व्यवस्थित कश्मीर (PoK) को भी अपनी चपेट में ले लिया है। बलूचिस्तान सहित विभिन्न इलाकों में केंद्र सरकार के विरुद्ध उठती आवाज़ों के बीच PoK के कई हिस्सों में प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं और तनाव के हालात बन गए हैं। मीरपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और शासन—प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी तेज़ हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिये पाक सरकार ने सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती कर दी है और इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दी गई हैं।
प्रदर्शन और गोलीबारी — स्थिति कब तक बेकाबू हुई?
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक मीरपुर में हुए एक बड़ी रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी टकराव दर्ज किया गया। अफ़वाहों और वीडियो क्लिपों से पता चला कि कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों ने कथित रूप से फायरिंग की, जिसमें दो लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबरें आईं। ये घटनाएँ सार्वजनिक गुस्से को और भड़का गयीं — लोग सरकार के खिलाफ ज़ोरदार नारे लगा रहे और कई स्थानों पर माहौल उग्र हो गया।
मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो — माहौल का मंजर
सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर प्रकाशित वीडियोज़ में प्रदर्शनकारी सड़कों पर चिल्लाते, झंडे लहराते और कभी-कभी ताबड़तोड़ फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ क्लिपों में लोग खाली कारतूस दिखाते और गोलियों की आवाज़ें रिकॉर्ड की जा रही हैं। इन दृश्यों ने यह संकेत दिया कि हालात नियंत्रित से बाहर हो सकते हैं और स्थनीय प्रशासन गंभीर रूप से सतर्क है।
सुरक्षा तैनाती और इंटरनेट बंद — सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार ने तनाव बढ़ने पर PoK में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात कर दिये हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पड़ोसी पंजाब प्रांत से सैनिकों को PoK भेजा गया और इस्लामाबाद से अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई। साथ ही, इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को सस्पेंड कर दिया गया—एक ऐसा कदम जो अक्सर अशांति के दौरान सूचना के प्रसार को रोकने और नियंत्रण बनाए रखने के लिये उठाया जाता है।
अवामी एक्शन कमेटी की हड़ताल और मांगे
इन विरोधों का नेतृत्व संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी कर रही है, जिसने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है — बाजार, दुकानें और परिवहन सेवाएँ ठप पड़ी हैं। कमेटी ने 38-सूत्रीय चार्टर जारी कर प्रशासनिक सुधारों, बिजली और आरक्षण जैसी मांगों की सूची पेश की है। प्रदर्शनकारी विशेष रूप से कश्मीरी शरणार्थियों के लिये आरक्षित 12 विधानसभा सीटों के मुद्दे पर संवेदनशील हैं और उनका कहना है कि यह आरक्षण स्थानीय जनता के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर रहा है।
मांगों का मुद्दा — बिजली, अधिकार और प्रतिनिधित्व
आंदोलनकारियों की अन्य प्रमुख मांगों में मंगला हाइड्रो-पावर परियोजना से मिलने वाली सस्ती बिजली का वितरण और पुरानी सरकारी वायदों को पूरा कराना शामिल है। अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख शौकत नवाज मीर ने आंदोलन को हटाकर किसी संस्था पर नहीं बल्कि बुनियादी अधिकारों की माँग बताया और कहा कि पीड़ितों को पिछले दशकों में उनके हक नहीं मिले — अब या तो अधिकार दिये जाएँ या फिर जनता के गुस्से को झेलने के लिये तैयार रहा जाये।
आगे का रास्ता — कहीं बड़ा उबाल तो नहीं?
अभी स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सुरक्षा बलों की तैनाती और इंटरनेट पर रोक से तत्काल नियंत्रण हो सकता है, पर स्थानीय असंतोष और प्रदर्शनकारियों की माँगें अगर शांतिपूर्ण रूप से नहीं सुलझायीं गयीं, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। पड़ोसी प्रभावों, राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और केंद्र सरकार की नीति-निर्धारण प्रक्रियाओं के आधार पर ही यह तय होगा कि क्या यह अस्थायी गोलमाल है या कहीं बड़ा राजनीतिक उबाल बनकर उभरेगा।














