
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पाकिस्तान के हवाई हमले में तहरीक-ए-तालिबान के नेता नूर वली महसूद की हत्या हो गई है। अमू टीवी के सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई है। नूर वली, तहरीक-ए-तालिबान (TTP) का मुखिया था, जिसे पाकिस्तान आतंकवादी संगठन मानता है। लंबे समय से उसका नाम पाकिस्तान की हिटलिस्ट में शामिल था।
नूर वली महसूद की हत्या में अमेरिका की भूमिका
नूर वली की हत्या में केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अमेरिका की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। काबुल पर एयर स्ट्राइक करने से पहले पाकिस्तान ने अमेरिका से अनुमति ली थी। नूर को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया था और उस पर 50 लाख डॉलर का ईनाम रखा गया था।
TTP मुखिया नूर वली महसूद कौन था?
मुल्ला फ़ज़लुल्लाह की हत्या के बाद 2018 में मुफ्ती नूर वली महसूद ने तहरीक-ए-तालिबान की कमान संभाली। उस समय अफगानिस्तान पर अमेरिका का नियंत्रण था। TTP ने तालिबान के साथ मिलकर अमेरिकी सत्ता को चुनौती दी, जिससे अंततः अमेरिका को अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा।
महसूद के नेतृत्व में TTP ने पाकिस्तान में आतंक का माहौल बना दिया। इस साल अब तक 700 से अधिक हमले हुए, जिनमें 270 से ज्यादा जवानों की जान गई।
नूर ने नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसूफजई को भी निशाना बनाने का आदेश दिया था। इसके बाद मलाला पर तालिबानी आतंकियों ने हमला किया।
इसके अलावा, नूर वली महसूद ही पहला तालिबानी आतंकी था, जिसने पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या से जुड़े कई खुलासे किए। उसने पहली बार बताया कि बेनज़ीर की हत्या में तालिबान के आतंकियों की भूमिका थी।
तालिबान-पाकिस्तान संबंधों पर असर
नूर वली की हत्या के लिए पाकिस्तान द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक में 12 अन्य लोगों की मौत भी हुई। तालिबान ने इस हमले को काबुल की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। अब पूरी दुनिया की नजर तालिबान की प्रतिक्रिया पर है।
तालिबान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उसके क्षेत्र में किसी भी तरह की घुसपैठ का परिणाम गंभीर हो सकता है। ऐसे में काबुल स्ट्राइक के बाद माना जा रहा है कि तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ बड़े पैमाने पर संघर्ष की शुरुआत कर सकता है।














