
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में दो बेहद खतरनाक आतंकवादी समूहों – इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) – के बीच बढ़ते गठबंधन का खुलासा हुआ है। खुफिया एजेंसियों के गोपनीय डोजियर के मुताबिक, यह गठजोड़ न केवल बलूचिस्तान और अफगानिस्तान में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है, बल्कि भारत के जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में भी आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की पाकिस्तान की योजना का हिस्सा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद (JEM), हिज़बुल मुजाहिदीन (HM) और लश्कर जैसे समूहों को खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में स्थानांतरित किया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ISI अब ISKP का इस्तेमाल नए रणनीतिक उद्देश्यों के लिए कर रही है। ISKP का मकसद बलूच राष्ट्रवादियों और असंतुष्ट तालिबान गुटों को निशाना बनाना है, वहीं इसमें जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने के पाकिस्तानी प्रयास भी शामिल हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इस साल पहलगाम में पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकियों ने हमला किया था।
नया खुलासा: मीर शफीक मेंगल और राना मोहम्मद अशफाक की मुलाकात
हाल ही में सामने आई तस्वीर में ISKP के बलूचिस्तान समन्वयक मीर शफीक मेंगल, लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर राना मोहम्मद अशफाक को पिस्तौल भेंट करते हुए देखे गए। यह प्रतीकात्मक घटना दोनों संगठनों के बढ़ते गठजोड़ की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार, मेंगल बलूचिस्तान के मस्तुंग और खुजदार क्षेत्रों में ISKP संचालन की देखरेख कर रहा है, जिसमें ठिकानों, धन और हथियारों का प्रबंधन शामिल है। वहीं, राना अशफाक नए आतंकवादी नेटवर्क तैयार करने और चरमपंथी गुटों से तालमेल बनाने में जुटा है।
ISI का समर्थन और पुराने नेटवर्क का इस्तेमाल
मस्तुंग और खुजदार जिलों में 2018 से ISKP के दो प्रमुख ऑपरेशनल बेस हैं, जिन्हें आईएसआई वित्तीय और हथियार आपूर्ति प्रदान कर रही है। इन बेसों का नेतृत्व मेंगल कर रहा था, जिनका लक्ष्य बलूच विद्रोहियों और अफगानिस्तान में सीमापार हमले करना था। मार्च 2025 में बलूच लड़ाकों ने मस्तुंग में ISKP के ठिकाने पर हमला कर 30 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। इसके जवाब में ISI ने लश्कर को हस्तक्षेप के लिए निर्देशित किया।
लश्कर-ए-तैयबा भी लंबे समय से बलूचिस्तान में सक्रिय है। 2002 से 2009 के बीच उसका प्रशिक्षण केंद्र क्वेटा में संचालित था, जहां 2006 में इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी यासिन भटकल प्रशिक्षण ले चुका था। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा ISKP-LeT गठजोड़ अल-कायदा के साथ लश्कर के अफगान जिहाद सहयोग की पुनरावृत्ति जैसा है।
“यलगार” पत्रिका में कश्मीर पर फोकस
खुफिया रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ISKP की प्रचार पत्रिका “यलगार” में भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों का विस्तार करने की योजना प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह गठजोड़ न केवल अफगानिस्तान की सुरक्षा को चुनौती देता है, बल्कि पाकिस्तान सेना की उस योजना का भी संकेत देता है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर में फिर से उग्रवाद को भड़काया जा रहा है।
लश्कर कमांडरों ने बुलाया जिगरा, बलूचों के खिलाफ जिहाद का ऐलान
जून में लश्कर प्रमुख राना मोहम्मद अशफाक बलूचिस्तान पहुंचे और उनके उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी ने ‘जिगरा’ (पश्तो सभा) बुलाई। इस सभा में बलूच अलगाववादियों के खिलाफ जिहाद की घोषणा की गई और “पाकिस्तान-विरोधी ताकतों को उखाड़ फेंकने” की कसम खाई गई। खुफिया सूत्रों के अनुसार, मीर शफीक मेंगल और राना अशफाक की हालिया तस्वीर इस गठबंधन की औपचारिक पुष्टि करती है।
यह नया गठजोड़ न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरे की घंटी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान अपने “नए प्रॉक्सी नेटवर्क” के तहत ISKP और लश्कर जैसे संगठनों को एकजुट करके क्षेत्रीय अशांति को भड़काने की कोशिश कर रहा है।














