झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को यह आंदोलन 12वें दिन में प्रवेश कर गया। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारी विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
रांची के स्टेडियम परिसर में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का आमरण अनशन भी जारी है। उनका अनशन बुधवार को तीसरे दिन में पहुंच गया है। आंदोलनकारी अब अपने विरोध को और व्यापक बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। विधानसभा घेराव की घोषणा से पहले बुधवार शाम एक बड़े कैंडल मार्च की तैयारी की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने की संभावना है। इस बीच जानकारी सामने आई है कि झारखंड सरकार के कुछ मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति आज आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत करने पहुंच सकती है, ताकि गतिरोध खत्म करने की कोशिश की जा सके।
सीएम से सीधे बातचीत की मांग पर अड़े छात्र
देवेंद्र नाथ महतो के साथ आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि वे किसी मंत्री, अधिकारी या सरकारी समिति के साथ बातचीत नहीं करेंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार समाधान चाहती है तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं आगे आकर छात्रों से संवाद करें। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग विवादित परीक्षाओं को रद्द करना है और जब तक इस पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनकारी छात्रों ने यह मांग भी दोहराई है कि कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के बिना छात्रों का भरोसा बहाल नहीं हो सकता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है।
CID की कार्रवाई लगातार जारी, अब तक 14 आरोपी गिरफ्तार
एक ओर छात्र सड़कों पर न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर झारखंड पुलिस की अपराध जांच विभाग (CID) भी मामले की जांच में लगातार कार्रवाई कर रही है। एजेंसी अब तक इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। मंगलवार को तीन और आरोपियों को हिरासत में लिया गया, जिनकी पहचान उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत और रमेश कुमार के रूप में हुई है।
CID ने जांच के दौरान राज्य के कई जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में बिचौलियों, कथित मास्टरमाइंड और कुछ कोचिंग संस्थानों से जुड़े कुल 18 ठिकानों पर तलाशी ली गई। इस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, खाली चेक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इसी जांच के दौरान कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है।
जांच में सामने आया कथित 'सेटिंग नेटवर्क'
CID के अनुसार शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि गिरफ्तार आरोपी परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी TDPL के कुछ लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे थे। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराने के नाम पर कथित तौर पर "सेटिंग-गेटिंग" का एक संगठित नेटवर्क तैयार कर रखा था।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में सफलता का भरोसा दिलाने के नाम पर कितने अभ्यर्थियों से धन वसूला गया। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि कथित तौर पर वसूली गई रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और उसका बंटवारा किस प्रकार किया गया। CID का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे तथा गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
कौन है अभय तिवारी? पेपर लीक जांच में कैसे सामने आया नाम
इसी बीच जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा अभय तिवारी की हो रही है, जिसे जांच एजेंसियां कथित तौर पर पूरे नेटवर्क का अहम किरदार मान रही हैं। छात्रों का आरोप है कि जिस जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर वे कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, उसी परीक्षा में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का संचालन टीडीपीएल (TSR Data Processing Private Limited) ने किया था। परीक्षा परिणाम घोषित होने पर अभय तिवारी दूसरे स्थान पर रहा। जांच के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी इसी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में भी कार्यरत था। यही तथ्य अब पूरे मामले का सबसे बड़ा विवाद बन गया है और जांच एजेंसियां इसकी अलग-अलग पहलुओं से पड़ताल कर रही हैं।
दो नामों से काम करने का आरोप
CID की जांच के मुताबिक अभय तिवारी कथित तौर पर दो अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। एजेंसी का दावा है कि उसने एक नाम अभय तिवारी और दूसरा नाम मनोज तिवारी रखा था। जांच में आरोप लगाया गया है कि अभय तिवारी के नाम से वह गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत था, जबकि मनोज तिवारी नाम से टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा था।
जांच एजेंसी के अनुसार, इसी दोहरी पहचान का इस्तेमाल करते हुए वह कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े नेटवर्क में सक्रिय था। यही वजह है कि अब जांच का बड़ा फोकस उसकी भूमिका और उससे जुड़े लोगों पर है।
कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का भी दावा
CID के मुताबिक अभय तिवारी केवल जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का दूसरा टॉपर ही नहीं था, बल्कि वर्ष 2013 से अब तक उसने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की थी। एजेंसी को उसके ठिकानों से मिले दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि उसके पास कई सरकारी और केंद्रीय संस्थानों की परीक्षाओं से जुड़े प्रमाणपत्र बरामद हुए हैं।
इनमें वर्ष 2018 की पुलिस अवर निरीक्षक लिखित परीक्षा, वर्ष 2013 की भारतीय नौसेना में एसएआर पद की परीक्षा, वर्ष 2014 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के सहायक पद की लिखित परीक्षा, आईआरबी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, वर्ष 2018 की सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल परीक्षा, वर्ष 2014 की नॉर्दर्न कोलफील्ड्स (NCL) प्रारंभिक परीक्षा, जेएसएससी की पीजीटी शिक्षक एवं सीजीएल परीक्षाएं तथा जेपीएससी की एसीएफ, एफआरओ, एफएसओ और 11वीं से 13वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी इन सभी तथ्यों की अलग-अलग स्तर पर पुष्टि कर रही है।
प्री और मेन्स परीक्षा पास कराने के लिए तय था कथित रेट
CID का दावा है कि जांच के दौरान अभय तिवारी के पास से कई महत्वपूर्ण डिजिटल और वित्तीय दस्तावेज मिले हैं। इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक, चेकबुक, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट और अन्य संवेदनशील दस्तावेज शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए कथित तौर पर पांच लाख रुपये तक की मांग की जाती थी, जबकि मुख्य परीक्षा के लिए यह रकम 25 लाख रुपये तक बताई गई है। CID का दावा है कि मुख्य परीक्षा के लिए करीब 10 लाख रुपये अग्रिम के रूप में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि इन सभी तथ्यों की जांच अभी जारी है।
भुगतान नहीं करने वालों से लिए जाते थे ब्लैंक चेक
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन अभ्यर्थियों के पास तत्काल भुगतान करने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं होती थी, उनसे कथित तौर पर खाली चेक लिए जाते थे। CID ने बताया कि हजारीबाग में छापेमारी के दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेज और कई ब्लैंक चेक बरामद किए गए हैं, जिन्हें जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
एजेंसी का दावा है कि अब तक की जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि अभय तिवारी ने टीडीपीएल के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर इतनी गहरी पैठ बना ली थी कि वह भर्ती परीक्षाओं को प्रभावित करने वाले नेटवर्क का प्रमुख हिस्सा बन चुका था। जांच अधिकारी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं।
परिवार के लोगों को भी नौकरी दिलाने का आरोप
CID की जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि टीडीपीएल में कथित तौर पर मनोज तिवारी नाम से कार्यरत अभय तिवारी ने परीक्षा प्रक्रिया का लाभ उठाकर अपने परिवार के कुछ सदस्यों को भी सरकारी नौकरी दिलाने में भूमिका निभाई। जांच एजेंसी के अनुसार, उसके भाई, साली और भाभी को भी संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए सरकारी पद मिलने की बात सामने आई है। इन आरोपों की भी जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं के संचालन का जिम्मा टीडीपीएल को सौंपा था। इसी कारण अब कंपनी की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
TDPL को लेकर भी उठे कई सवाल
जांच के दौरान टीडीपीएल को लेकर भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी का मुख्य कार्यालय लखनऊ में स्थित है। इससे पहले उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 की ग्रामीण विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोप भी इस कंपनी पर लगे थे। बाद में वर्ष 2021 में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने कंपनी के निदेशक रामबीर और सत्यपाल को गिरफ्तार किया था।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधानसभा स्टाफ भर्ती से जुड़े विवादों में भी कंपनी का नाम सामने आया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद झारखंड में कंपनी को परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी मिलती रही। बताया जा रहा है कि मई 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग ने पहली बार कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट किया था, लेकिन लगभग एक महीने बाद जून में प्रतिबंध हटाकर उसे फिर से परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी गई। जांच में यह भी सामने आया है कि इस वर्ष फरवरी में रांची के एक शिकायतकर्ता ने JPSC को कंपनी के खिलाफ लिखित शिकायत भी दी थी।
छात्र कर रहे निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है और जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जा रहा है।













