भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार (22 सितंबर) को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुलाकात के बाद रुबियो ने दोनों देशों के रिश्तों पर प्रतिक्रिया दी और भारत के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने व्यापारिक समझौते (ट्रेड डील) और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर भी अपनी राय रखी। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव बढ़ गया था।
भारत के लिए सकारात्मक संदेश
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में रुबियो ने कहा, “भारत, अमेरिका के लिए अत्यंत अहम साझेदार है।” उन्होंने विशेष रूप से भारत की ट्रेड, डिफेंस, ऊर्जा, दवाइयों (फार्मास्यूटिकल्स) और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भूमिका की सराहना की। उनका कहना था कि भारत न केवल एशिया बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी एक बड़ा योगदानकर्ता है।
Met with Indian External Affairs Minister @DrSJaishankar at UNGA. We discussed key areas of our bilateral relationship, including trade, energy, pharmaceuticals, and critical minerals and more to generate prosperity for India and the United States. pic.twitter.com/5dZJAd85Za
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio)
H-1B वीजा विवाद से बढ़ा तनाव
भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ से उपजा विवाद अब H-1B वीजा के नए शुल्क को लेकर और गहरा गया है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में नए H-1B वीजा पर 100,000 डॉलर का शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों में चिंता की लहर दौड़ गई है। चूंकि भारत इस वीजा का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, इसलिए यह फैसला सीधे तौर पर भारतीय टेक सेक्टर को प्रभावित करता है। हालांकि, जयशंकर और रुबियो की मुलाकात से उम्मीद जगी है कि इस मुद्दे पर समाधान का कोई रास्ता निकलेगा और भविष्य में व्यापारिक समझौते को लेकर ठोस प्रगति हो सकती है।
जयशंकर का बयान
मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “न्यूयॉर्क में मार्को रुबियो से सार्थक चर्चा हुई। हमने द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। यह संवाद भविष्य में भी जारी रहेगा।”














