
नेपाल में हालिया विरोध प्रदर्शनों की आंच थमी भी नहीं थी कि अब फ्रांस की गलियों में भी गुस्से का लावा फूट पड़ा। बुधवार सुबह से ही राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ शुरू हुए ब्लॉक एवरीथिंग आंदोलन ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जगह-जगह प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने हालात और बिगाड़ दिए। यहां तक कि कई सार्वजनिक बसें भी आग की भेंट चढ़ गईं।
सुरक्षा घेरे में भी बिगड़े हालात
सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की, लेकिन इसके बावजूद राजधानी पेरिस समेत बोर्डो, मार्से और लियोन जैसे बड़े शहरों में हालात बेकाबू हो गए। यह सब उस समय हो रहा है जब फ्रांस की राजनीति पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। संसद द्वारा प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू पर अविश्वास प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद राष्ट्रपति मैक्रों को अपने कार्यकाल के पाँचवें प्रधानमंत्री के रूप में सेबास्टियन लेकोर्नू की नियुक्ति करनी पड़ी।
#Paris, les manifestants essayent de pénétrer dans la Gare du Nord. La police fait usage de gaz lacrymogène. #streetreporter #france #onbloquetout #10septembre #blocus #bloquonstout #10septembre2025 #blocus #manifestation pic.twitter.com/0YMheEOyRC
— Jules Ravel (@JulesRavel1) September 10, 2025
क्या है ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ आंदोलन?
नाम से ही स्पष्ट है कि इस आंदोलन का उद्देश्य देश की मशीनरी को रोकना है। प्रदर्शनकारी मानते हैं कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था जनता की समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह नाकाम रही है। शुरुआत दक्षिणपंथी समूहों ने की थी, लेकिन अब यह लहर वामपंथी और अतिवामपंथी संगठनों तक भी फैल चुकी है।
इस आंदोलन का नारा है— “अगर सिस्टम काम नहीं करता, तो सिस्टम को रोक दो।” इसी विचारधारा के चलते प्रदर्शनकारियों ने हाईवे, परिवहन और शहरों की मुख्य सड़कों को ठप कर दिया। हालात पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने 80,000 सुरक्षाबलों की तैनाती की है, जिनमें से 6,000 अकेले पेरिस में मौजूद हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि करीब 1 लाख लोग इस विरोध में शामिल हो सकते हैं।
यलो वेस्ट आंदोलन की याद
खबरों के मुताबिक ब्लॉक एवरीथिंग की गूंज फ्रांस को 2018 के यलो वेस्ट आंदोलन की याद दिला रही है। उस दौर में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ भड़का गुस्सा राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियों पर बड़ा जनविरोध बन गया था। आज भी कुछ वैसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है— सड़कों पर नारों की गूंज, बैनर और सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी।
गिरफ्तारियां और सड़क जाम
फ्रांस के गृह मंत्री ब्रूनो रेटायो ने बताया कि बोर्डो में करीब 50 नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने हाईवे पर कब्जा करने की कोशिश की। वहीं, टूलूज़ में केबल में आग लगने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। पेरिस पुलिस ने अब तक 75 प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। वहीं विंसी ट्रांसपोर्ट कंपनी ने कहा है कि मार्से, मोंपेलिए, नांत और लियोन जैसे शहरों में यातायात पूरी तरह चरमरा गया है।














