
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि अगर तेहरान ने जल्द समझौते की दिशा में कदम नहीं बढ़ाया, तो उसके परिणाम बेहद गंभीर और “दर्दनाक” होंगे। वॉशिंगटन डीसी में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका अब और इंतजार के मूड में नहीं है।
समझौते पर ट्रंप का सख्त रुख
ट्रंप ने कहा, “हमें किसी न किसी रूप में समझौते तक पहुंचना ही होगा। मैं टकराव नहीं चाहता, लेकिन हालात को अनिश्चित भी नहीं छोड़ा जा सकता। अगर ईरान ने पहले ही सहमति दे दी होती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।” उन्होंने ‘मिडनाइट हैमर’ का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल रहती है तो भविष्य की कार्रवाई और भी कड़ी हो सकती है।
उनका इशारा जून 2025 में ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों की ओर था, जिन्हें अमेरिकी प्रशासन ने निर्णायक कार्रवाई बताया था। ट्रंप ने दोहराया कि “अगर वे समझौता नहीं करते, तो कहानी बिल्कुल अलग मोड़ ले सकती है।”
नेतन्याहू संग बैठक को बताया अहम
ट्रंप ने यह भी बताया कि हाल ही में Benjamin Netanyahu के साथ उनकी विस्तृत चर्चा हुई, जिसे उन्होंने “बहुत सकारात्मक और उपयोगी” करार दिया। उनके मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय वही लेंगे।
बैठक के बाद उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका एक “मजबूत और व्यापक” समझौते की अपेक्षा रखता है, जिसमें केवल परमाणु गतिविधियां ही नहीं, बल्कि मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे मुद्दे भी शामिल हों।
VIDEO | Washington DC: On Iran, US President Donald Trump says, "We have to make a deal. Otherwise, it's going to be very dramatic. I don't want that to happen, but we have to make a deal. They should have made a deal the first time, then they got Midnight Hammer instead. And… pic.twitter.com/Gs3cgVxBcx
— Press Trust of India (@PTI_News) February 12, 2026
नेतन्याहू का बयान: दबाव से संभव है समझौता
इज़राइल लौटने से पहले नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप का मानना है कि कड़े रुख और अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए ईरान को “बेहतर समझौते” के लिए तैयार किया जा सकता है। मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रा संक्षिप्त जरूर थी, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रही।
नेतन्याहू ने माना कि ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को लेकर उनकी शंकाएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने व्हाइट हाउस के सामने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी डील में केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि बैलिस्टिक मिसाइलें और ईरान समर्थित क्षेत्रीय गुटों की गतिविधियां भी शामिल होनी चाहिए।
बढ़ता कूटनीतिक तनाव
ईरान को लेकर अमेरिका और इज़राइल का साझा रुख यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। ट्रंप के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वॉशिंगटन अब निर्णायक प्रगति चाहता है—चाहे वह बातचीत की मेज पर हो या फिर दबाव की रणनीति के जरिए।














