
वॉशिंगटन से एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर अपनी भूमिका का जिक्र किया है। उनका कहना है, “उसने मुझे मारने की दो बार कोशिश की थी। इससे पहले कि वह सफल होता, मैंने उसे मार गिराया।” यह बयान The Spectator Index के हवाले से सामने आया है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
ईरान की सुरक्षा बलों को चेतावनी
खामेनेई की मौत के बाद ट्रंप ने ईरान की सैन्य और अर्धसैनिक इकाइयों को कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड, ईरानी सेना और पुलिस से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा करने पर उन्हें “पूर्ण सुरक्षा” दी जाएगी। अन्यथा “निश्चित परिणामों” का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्रवाई इसलिए जरूरी थी ताकि अमेरिका को भविष्य में किसी ऐसे शासन का सामना न करना पड़े, जो परमाणु हथियारों से लैस हो और जिसे वह “कट्टरपंथी और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला” बताते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों से अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाते रहे हैं और इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का जिक्र
अपने बयान में ट्रंप ने पिछले 36 घंटों के सैन्य अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकाने, वायु रक्षा प्रणालियां और नौसैनिक संसाधन शामिल बताए गए। ट्रंप के अनुसार, नौ जहाजों और उनसे जुड़े नौसैनिक ढांचे को नष्ट कर दिया गया है।
उन्होंने दावा किया कि ईरान की शीर्ष सैन्य कमान अब अस्तित्व में नहीं है और कई अधिकारी आत्मसमर्पण की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी घोषित लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते।
ईरानी जनता से अपील
अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने ईरान के नागरिकों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जो लोग “स्वतंत्रता” की इच्छा रखते हैं, वे इस मौके का फायदा उठाएं और अपने देश की दिशा बदलने का साहस दिखाएं। उन्होंने दोहराया, “मैंने आपसे एक वादा किया था और मैंने उसे पूरा किया है। अमेरिका आपके साथ खड़ा है।”














