महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों विपक्षी दलों के संभावित पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के कांग्रेस में विलय की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि यदि शरद पवार अपनी पार्टी के भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला करना चाहते हैं, तो कांग्रेस का रास्ता चुनने के बजाय उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने पर विचार करना चाहिए।
हाल के दिनों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विपक्षी खेमे से जुड़े कई नेताओं ने क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस के साथ आने की सलाह दी है। इसी कड़ी में शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भी विभिन्न क्षेत्रीय पार्टियों से कांग्रेस को मजबूत करने के लिए विलय या करीबी सहयोग की अपील की थी। लेकिन रामदास अठावले का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस पहले जैसी प्रभावशाली स्थिति में नहीं है।
कांग्रेस की बजाय NDA बेहतर विकल्प: अठावले
रामदास अठावले ने कहा कि एक समय ऐसा था जब उन्होंने स्वयं शरद पवार को कांग्रेस के साथ जाने की सलाह दी थी। हालांकि अब राजनीतिक हालात बदल चुके हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस का जनाधार और प्रभाव पहले की तुलना में काफी कमजोर हुआ है, इसलिए किसी भी क्षेत्रीय दल के लिए उसमें विलय करना व्यावहारिक कदम नहीं माना जा सकता।
अठावले का कहना है कि यदि शरद पवार राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका बनाए रखना चाहते हैं, तो उनके लिए NDA में शामिल होना ज्यादा लाभदायक और राजनीतिक रूप से समझदारी भरा फैसला हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में NDA देश का सबसे मजबूत राजनीतिक गठबंधन है और इसमें शामिल होकर शरद पवार अपनी राजनीतिक ताकत को नए आयाम दे सकते हैं।
BJP से परेशानी है तो RPI में आ जाइए
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, रामदास अठावले ने इस मुद्दे पर हल्के-फुल्के व्यंग्यात्मक अंदाज में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी वजह से शरद पवार बीजेपी के साथ सीधे तौर पर नहीं आना चाहते, तो उनके पास एक और विकल्प मौजूद है।
अठावले ने मुस्कुराते हुए कहा कि शरद पवार चाहें तो अपनी पार्टी का विलय रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले गुट) में भी कर सकते हैं। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसे विपक्षी एकता की बहस के बीच एक अलग राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
संजय राउत ने दी थी कांग्रेस को मजबूत करने की सलाह
दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस के साथ आने की सलाह दी थी। राउत का मानना है कि भारतीय राजनीति में बीजेपी के मुकाबले एक प्रभावी और मजबूत विपक्ष खड़ा करने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट होना जरूरी है।
उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (शरद पवार गुट) जैसी पार्टियों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इन दलों को कांग्रेस के साथ विलय या व्यापक सहयोग पर विचार करना चाहिए। राउत के अनुसार, इससे विपक्षी खेमे को मजबूती मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक विकल्प तैयार किया जा सकेगा।
शरद पवार की भूमिका पर भी दिया था जोर
संजय राउत ने अपने बयान में यह भी कहा था कि विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में शरद पवार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने पवार को अनुभवी और प्रभावशाली नेता बताते हुए कहा था कि यदि वे पहल करें, तो कई छोटे और क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ जुड़ने के लिए तैयार हो सकते हैं।
हालांकि, अब रामदास अठावले के ताजा बयान ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ विपक्षी खेमे के कुछ नेता कांग्रेस को मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अठावले शरद पवार को NDA का हिस्सा बनने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में शरद पवार और उनकी पार्टी इस विषय पर क्या रुख अपनाती है, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों और समर्थकों की नजरें टिकी रहेंगी।














