
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने गुरुवार को बताया कि ईरान में जारी तनाव को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान के माध्यम से वार्ता हो रही है। डार ने मीडिया में चल रही अटकलों को अनावश्यक बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में पाकिस्तान एक मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है।
डार ने ट्वीट किया, "मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांति प्रक्रिया पर मीडिया में अनावश्यक चर्चा हो रही है। वास्तव में, अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत पाकिस्तान के माध्यम से हो रही है। इस संदर्भ में अमेरिका ने 15 बिंदु साझा किए हैं, जिन पर ईरान विचार कर रहा है। तुर्की और मिस्र जैसे दोस्त देश भी इस पहल का समर्थन कर रहे हैं। पाकिस्तान शांति स्थापना के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।"
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने भी इसकी पुष्टि की है। अराघची ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे औपचारिक वार्ता नहीं माना जाना चाहिए।
There has been unnecessary speculation in the media regarding peace talks to end ongoing conflict in the Middle East. In reality, US-Iran indirect talks are taking place through messages being relayed by Pakistan. In this context, the United States has shared 15 points, being…
— Ishaq Dar (@MIshaqDar50) March 26, 2026
प्रमुख असहमति के मुद्दे
अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों पर मतभेद स्पष्ट हैं। अमेरिका ने स्पष्ट रूप से अपनी शर्तें रख दी हैं, जिसमें ईरान का मिसाइल कार्यक्रम कम करना और परमाणु हथियार न बनाने की कसम शामिल है। वहीं ईरान ने कहा है कि वह अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी से समझौता नहीं करेगा। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिका से मिडिल ईस्ट से अपने सैन्य बेस हटाने और अब तक हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग रखी है।
क्या जल्द रुक सकता है युद्ध?
हालांकि वार्ता की शुरुआत हो गई है, लेकिन युद्ध तुरंत रुकने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। दोनों पक्ष एक सम्मानजनक समझौते की ओर बढ़ेंगे, लेकिन अपनी शर्तों पर अड़ंगे भी नहीं हटाएंगे। ईरान समय का फायदा उठाकर अमेरिका को अपनी मांगों के प्रति बाध्य करना चाहता है, जबकि अमेरिका जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करना चाहता है लेकिन हारता हुआ नहीं दिखना चाहता। इस परिदृश्य में ट्रंप ऐसा समझौता नहीं करेंगे, जिसमें उनकी स्थिति कमजोर दिखाई दे।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष संवाद तो शुरू हो गया है, लेकिन असली चुनौती इन दोनों देशों की शर्तों में सामंजस्य बैठाने की है।














