भारत में डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में UPI ने जिस तरह से क्रांति लाई है, उसने लोगों के लेन-देन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। आज छोटी-सी खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक अधिकांश लोग मोबाइल से कुछ सेकंड में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। यही वजह है कि विदेशों से आने वाले लोग भी भारत की इस डिजिटल व्यवस्था की अक्सर तारीफ करते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि इतनी आसान पेमेंट सुविधा के कारण खर्च करने की आदत भी पहले से ज्यादा बढ़ गई है। इसी विषय पर दिल्ली की एक युवती ने अपना अनुभव साझा किया है, जिसने कुछ समय के लिए UPI का इस्तेमाल कम कर कैश से भुगतान करना शुरू किया और दावा किया कि इससे उसके अनावश्यक खर्चों में उल्लेखनीय कमी आई।
दिल्ली निवासी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सदाफ ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए बताया कि पहले वह लगभग हर तरह के भुगतान के लिए केवल UPI पर निर्भर रहती थीं। लेकिन लगातार बढ़ते छोटे-छोटे खर्चों को देखते हुए उन्होंने अपनी आदत बदलने का फैसला किया। उन्होंने तय किया कि रोजमर्रा के अधिकांश लेन-देन अब नकद यानी कैश से ही किए जाएंगे। सदाफ का कहना है कि इस बदलाव के बाद उन्हें न सिर्फ अपने खर्चों पर बेहतर नियंत्रण मिला, बल्कि बचत करना भी पहले की तुलना में आसान हो गया।
वीडियो में सदाफ ने बताया कि पिछले दो महीनों से वह इस नई आदत का पालन कर रही हैं। उनके मुताबिक सबसे बड़ा अंतर यह महसूस हुआ कि अब हर खर्च का एहसास पहले से कहीं ज्यादा होने लगा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट में कुछ सेकंड में ट्रांजैक्शन पूरा हो जाता है, इसलिए छोटी-छोटी खरीदारी का हिसाब अक्सर दिमाग में नहीं रहता। कॉफी लेना, स्नैक्स मंगवाना या ऑनलाइन कोई छोटी चीज खरीदना उस समय मामूली खर्च लगता है, लेकिन ऐसे कई छोटे भुगतान मिलकर कब 1,000 रुपये या उससे अधिक हो जाते हैं, इसका पता भी नहीं चलता। वहीं जब जेब से नकद पैसा निकलता है तो खर्च का वास्तविक एहसास होता है और व्यक्ति सोच-समझकर खरीदारी करता है।
बजट संभालने में कैश बना मददगार
सदाफ का कहना है कि नकद भुगतान करते समय 500 रुपये खर्च करने में भी सोचने का समय मिलता है, जबकि UPI के जरिए कई बार 1,000 रुपये तक का भुगतान भी बिना ज्यादा विचार किए हो जाता है। उनका मानना है कि जब हाथ से नोट निकलते हैं तो व्यक्ति को तुरंत महसूस होता है कि उसकी जेब हल्की हो रही है। यही एहसास खर्च पर नियंत्रण रखने में मदद करता है। डिजिटल भुगतान में यह मानसिक प्रभाव काफी कम हो जाता है, जिससे अनजाने में खर्च बढ़ सकता है।
UPI पूरी तरह नहीं छोड़ा, अपनाया संतुलित तरीका
हालांकि सदाफ ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने UPI का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं किया है। उनके अनुसार आज के समय में डिजिटल पेमेंट से पूरी तरह दूरी बनाना व्यावहारिक नहीं है। कई बार ऐसी परिस्थितियां होती हैं, जब कैश से भुगतान करना आसान नहीं होता। उदाहरण के तौर पर यदि किसी दुकान का बिल 470 रुपये है और ग्राहक के पास केवल 500 रुपये का नोट है, तो जरूरी नहीं कि दुकानदार के पास छुट्टे पैसे उपलब्ध हों। ऐसी स्थिति में UPI सबसे सुविधाजनक विकल्प बन जाता है।
इसी वजह से उन्होंने अब एक संतुलित तरीका अपनाया है। सदाफ बताती हैं कि वह अपने कुल खर्च के लिए लगभग 80 प्रतिशत राशि नकद अपने पास रखती हैं, जबकि शेष 20 प्रतिशत बैंक खाते में छोड़ती हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर UPI के माध्यम से तुरंत भुगतान किया जा सके। उनके मुताबिक यह तरीका सुविधा और बचत दोनों के बीच बेहतर संतुलन बनाता है।
सदाफ ने कहा कि कैश साथ रखने की अपनी कुछ परेशानियां जरूर हैं, लेकिन इसके बावजूद वह फिर से हर छोटी-बड़ी खरीदारी के लिए केवल UPI पर निर्भर नहीं होना चाहतीं। उनका कहना है कि नकद भुगतान की आदत ने उन्हें अपने खर्चों के प्रति पहले से कहीं ज्यादा जागरूक बनाया है और अब उन्हें स्पष्ट रूप से पता रहता है कि उनका पैसा आखिर कहां और किस चीज पर खर्च हो रहा है।
वीडियो पर लोगों ने दी मिली-जुली प्रतिक्रिया
सदाफ के इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग राय रखी। कुछ लोगों ने उनके अनुभव से सहमति जताई और माना कि कैश में भुगतान करने से वास्तव में फिजूल खर्च कम होता है। वहीं कुछ यूजर्स ने इसे हर किसी के लिए व्यावहारिक नहीं बताया।
एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "दुर्भाग्य से अब कई जगह कैश स्वीकार ही नहीं किया जाता। खासकर जोमैटो और ब्लिंकिट जैसी सेवाओं पर कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प होने के बावजूद लोग UPI ही पसंद करते हैं। यहां तक कि इस सप्ताह पोस्ट ऑफिस में भी मुझसे कहा गया— 'मैम, UPI प्लीज।'"
एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, "मैंने भी कुछ समय तक ऐसा करने की कोशिश की थी, लेकिन छुट्टे पैसों की समस्या के कारण आखिरकार फिर से UPI का इस्तेमाल शुरू करना पड़ा।" वहीं एक अन्य यूजर ने सदाफ की बात का समर्थन करते हुए कहा कि कैश से भुगतान करने पर व्यक्ति अपने खर्चों को लेकर ज्यादा सतर्क रहता है और अनावश्यक खरीदारी से काफी हद तक बच जाता है।













