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YouTube से Instagram तक… बच्चों को अश्लील कंटेंट से सुरक्षित रखने के लिए तुरंत बदलें ये 5 अहम सेटिंग्स

आज के डिजिटल दौर में बच्चों को YouTube, Instagram और AI टूल्स पर अश्लील व भ्रामक कंटेंट से बचाने के लिए जानिए 5 जरूरी पेरेंटल कंट्रोल सेटिंग्स, फोन मॉनिटरिंग ऐप्स और सुरक्षित AI इस्तेमाल के आसान तरीके।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 18 Jan 2026 1:42:24

YouTube से Instagram तक… बच्चों को अश्लील कंटेंट से सुरक्षित रखने के लिए तुरंत बदलें ये 5 अहम सेटिंग्स

आज के डिजिटल दौर में बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन होना आम बात हो गई है, खासकर पढ़ाई और ऑनलाइन लर्निंग के नाम पर। लेकिन इसी के साथ माता-पिता की चिंता भी बढ़ जाती है कि कहीं उनका बच्चा गलती से अश्लील, भ्रामक या मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट के संपर्क में न आ जाए। तेजी से बढ़ते AI टूल्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और चैटबॉट्स ने यह चुनौती और भी गंभीर बना दी है।

हाल ही में सेल्सफोर्स द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, भारत में 73% लोग AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि इनमें Gen-Z की भागीदारी करीब 65% है। सोशल मीडिया और AI चैटबॉट्स के बढ़ते प्रभाव के कारण फेक न्यूज, डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। अमेरिका में एक 14 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या का मामला सामने आया था, जहां वह लंबे समय तक एक AI चैटबॉट से बातचीत करता रहा। वहीं हाल के दिनों में Grok जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी अश्लील कंटेंट को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे में बच्चों के लिए डिजिटल और AI प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी हो गया है।

दैनिक भास्कर ने साइबर सेफ्टी एक्सपर्ट्स के हवाले से कुछ जरूरी उपाय बताए हैं, जिनकी मदद से पैरेंट्स बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रख सकते हैं। आइए जानते हैं वे 5 अहम सेटिंग्स और टूल्स, जिन्हें तुरंत एक्टिव करना चाहिए।

फोन मॉनिटरिंग एप्स से रखें डिजिटल एक्टिविटी पर नजर

सिर्फ कंटेंट ही नहीं, बच्चों की पूरी डिजिटल गतिविधि पर निगरानी रखना भी जरूरी है। इसके लिए Watcher जैसे फोन मॉनिटरिंग एप्स उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन एप्स के जरिए माता-पिता बच्चे के फोन के नोटिफिकेशन देख सकते हैं, लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि कौन-सा एप कितनी देर तक इस्तेमाल किया गया।

ChatGPT: फैमिली अकाउंट से कंट्रोल रखें बातचीत पर


ChatGPT जैसे AI टूल्स बच्चों के लिए फायदेमंद भी हो सकते हैं, लेकिन बिना निगरानी के जोखिम भी बढ़ाते हैं। माता-पिता ChatGPT के फैमिली अकाउंट फीचर का इस्तेमाल कर बच्चों की एक्टिविटी पर कंट्रोल रख सकते हैं।

ऐसे करें सेटअप:

ChatGPT ऐप या वेबसाइट खोलें → Settings में जाएं → Parental Controls चुनें → “Add Family Member” पर क्लिक करें → बच्चे के अकाउंट से जुड़ा ई-मेल डालें → बच्चे के अकाउंट से रिक्वेस्ट अप्रूव करें। इसके बाद माता-पिता चैट लिमिट, टॉपिक कंट्रोल और उपयोग की सीमा तय कर सकते हैं।

Google Gemini: Family Link से करें मॉनिटरिंग

Google ने बच्चों के लिए अपने AI टूल्स को Family Link सिस्टम से जोड़ा है, जिससे पैरेंट्स बेहतर कंट्रोल पा सकते हैं।

ऐसे करें:

Play Store से Google Family Link ऐप डाउनलोड करें → बच्चे के Gmail अकाउंट को इससे लिंक करें → पैरेंट अकाउंट जोड़ें → Child Account ऑप्शन चुनें → Controls में जाकर Apps सेक्शन खोलें → Gemini पर जाएं और यहां से एक्सेस को सीमित करें।

YouTube: सबसे जरूरी पेरेंटल सेटिंग्स

बच्चों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्लेटफॉर्म YouTube है, इसलिए यहां कंट्रोल बेहद जरूरी है।

सेटिंग्स कैसे बदलें:

अगर बच्चे का अलग Google अकाउंट है, तो Google Family Link के जरिए YouTube एक्सेस को सीमित करें। सर्च रिजल्ट और रिकमेंडेशन को कंट्रोल करें। 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एक ही डिवाइस पर YouTube इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

अगर बच्चा आपके फोन या टैबलेट पर YouTube देखता है, तो प्रोफाइल फोटो पर क्लिक करें → Settings → Family Center → बच्चों के लिए अलग अकाउंट जोड़ें।

Instagram और Meta AI: Supervision Mode करें एक्टिव

Instagram पर AI कंटेंट और AI कैरेक्टर्स तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए यहां सुपरविजन मोड का इस्तेमाल जरूरी हो गया है।

ऐसे करें:

Instagram प्रोफाइल खोलें → मेन्यू में जाएं → “Supervision for Teens” ऑप्शन चुनें → बच्चे के फोन पर रिक्वेस्ट अप्रूव करवाएं। इसके बाद माता-पिता AI कैरेक्टर चैट ब्लॉक कर सकते हैं, खास कीवर्ड फिल्टर कर सकते हैं और Instagram इस्तेमाल के लिए टाइम लिमिट तय कर सकते हैं।

AI-बेस्ड पैरेंटल कंट्रोल एप्स से करें अतिरिक्त सुरक्षा

हर प्लेटफॉर्म के इन-बिल्ट कंट्रोल्स हमेशा पर्याप्त नहीं होते। ऐसे में AI-आधारित पैरेंटल कंट्रोल एप्स अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं।

Net Nanny: वेबसाइट, सोशल मीडिया और चैट कंटेंट को फिल्टर करता है।

Canopy: फोटो और टेक्स्ट में मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट को AI की मदद से ब्लॉक करता है।

Qustodio: स्क्रीन टाइम, ऐप यूज और ब्राउजिंग हिस्ट्री पर नजर रखता है।

कैसे काम करते हैं:

ये एप्स बच्चों के फोन में बैकग्राउंड में चलते रहते हैं, अपने आप सेंसिटिव कंटेंट को ब्लॉक करते हैं और समय-समय पर माता-पिता को रिपोर्ट भेजते हैं। ये सभी एप्स Google Play Store पर आसानी से उपलब्ध हैं।

डिजिटल दुनिया बच्चों के लिए जितनी फायदेमंद है, उतनी ही संवेदनशील भी। सही सेटिंग्स और निगरानी के जरिए माता-पिता बच्चों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को एक सुरक्षित और सकारात्मक जगह बना सकते हैं।

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