
iPhone का नाम सुनते ही सबसे पहले लोगों के दाम दिमाग में आते हैं। हर साल Apple नए मॉडल लॉन्च करता है और उनकी कीमतें अक्सर सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में कहीं ज्यादा होती हैं। यह सवाल कई बार उठता है कि आखिर iPhone इतना महंगा क्यों होता है। इसका मुख्य कारण इसके प्रीमियम पार्ट्स और उच्च गुणवत्ता वाला निर्माण है। आइए जानते हैं iPhone का सबसे महंगा पार्ट कौन सा है और बाकी घटक कैसे इसकी कीमत बढ़ाते हैं।
iPhone का सबसे महंगा पार्ट: डिस्प्ले
iPhone में सबसे महंगा और अहम हिस्सा इसका डिस्प्ले होता है। Apple अपने iPhone में OLED या Super Retina XDR डिस्प्ले का इस्तेमाल करता है, जो Samsung और LG जैसी अग्रणी कंपनियों द्वारा बनाया जाता है। यह डिस्प्ले अत्याधुनिक तकनीक से लैस होता है और HDR सपोर्ट, हाई ब्राइटनेस, बेहतर कलर प्रिसिजन और स्मूथ टच रेस्पॉन्स जैसी खूबियों से भरपूर होता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ iPhone का डिस्प्ले ही 150 से 200 डॉलर (करीब 12,000 से 16,000 रुपये) तक का पड़ सकता है। यही कारण है कि अगर यह डिस्प्ले टूट जाए तो रिपेयरिंग की लागत भी बेहद अधिक होती है।
अन्य महंगे पार्ट्स जो कीमत बढ़ाते हैं
हालांकि डिस्प्ले सबसे महंगा हिस्सा है, iPhone के कई और घटक भी इसकी कीमत को ऊंचा करते हैं। Apple का खुद का डिज़ाइन किया हुआ A-सीरीज बायोनिक प्रोसेसर बेहद पावरफुल और ऊर्जा-कुशल होता है, जिसे बनाना और इंटीग्रेट करना महंगा होता है। इसके अलावा iPhone का मल्टी-कैमरा सिस्टम एडवांस सेंसर, OIS और AI-बेस्ड इमेज प्रोसेसिंग के साथ आता है।
इसके अलावा हाई-स्पीड NAND फ्लैश स्टोरेज, प्रीमियम बॉडी मटेरियल जैसे सर्जिकल-ग्रेड स्टेनलेस स्टील और सिरेमिक शील्ड, और विशेष बैटरी टेक्नोलॉजी भी इसकी लागत में इज़ाफा करते हैं।
सिर्फ हार्डवेयर ही नहीं, सॉफ्टवेयर भी अहम
iPhone की कीमत केवल हार्डवेयर पर निर्भर नहीं करती। Apple का iOS ऑपरेटिंग सिस्टम, मजबूत सिक्योरिटी फीचर्स, लंबे समय तक मिलने वाले अपडेट्स और ऐप ऑप्टिमाइजेशन भी इसे प्रीमियम बनाते हैं। रिसर्च और डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन और ब्रांड वैल्यू भी iPhone की कीमत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।














