
Apple Inc. ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं और इस दौरान कंपनी ने 94.04 अरब डॉलर (करीब 8.21 लाख करोड़ रुपये) का जबरदस्त रेवेन्यू दर्ज किया है। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10% की बढ़त दर्शाता है। वॉल स्ट्रीट के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए एप्पल ने एक बार फिर बाज़ार को चौंका दिया—जबकि अनुमान 89 अरब डॉलर (लगभग 7.77 लाख करोड़ रुपये) का था।
भारत में बनते iPhone, अमेरिका में बेचे जा रहे
इस जबरदस्त ग्रोथ के बीच एप्पल के CEO टिम कुक ने भारत की भूमिका को लेकर एक अहम बयान दिया है। कुक ने खुलासा किया कि अब अमेरिका में बिकने वाले अधिकांश iPhone भारत में निर्मित हो रहे हैं। हालांकि, अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी में हुए बदलावों ने इस पूरी प्रक्रिया पर एक नया आर्थिक दबाव डाल दिया है।
टैरिफ का दबाव और बढ़ती चिंता
टिम कुक ने स्पष्ट किया कि धारा 232 के तहत Apple के अधिकांश प्रोडक्ट जांच के घेरे में आ गए हैं, जिससे कंपनी को भारी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि केवल चौथी तिमाही में ही 1.1 अरब डॉलर तक का टैरिफ बोझ बन सकता है। Apple ने भले ही उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा चीन से भारत शिफ्ट कर दिया है, लेकिन IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लागू किए गए विशेष टैरिफ अब भी कंपनी की राह में रोड़ा बने हुए हैं।
गौरतलब है कि IEEPA, 1977 में पारित एक अमेरिकी कानून है जिसका इस्तेमाल अक्सर आर्थिक प्रतिबंधों और संपत्ति जब्त करने के लिए किया जाता रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसका इस्तेमाल टैरिफ लगाने के लिए किया।
ट्रंप की चेतावनी और भारत पर नाराज़गी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Apple के भारत में निर्माण फैसले से खासे नाराज़ हैं। ट्रंप ने टिम कुक को सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ' पर चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर iPhone का निर्माण अमेरिका के बाहर किया गया, तो कंपनी को कम से कम 25% का टैरिफ चुकाना होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है, और वे नहीं चाहते कि Apple भारत में उत्पादन करे।
भारत बना Apple का नया मैन्युफैक्चरिंग हब
इसके बावजूद Apple ने भारत में अपने पैर पसारने जारी रखे हैं। 'मेक इन इंडिया' जैसे सरकारी अभियानों, सस्ती लेबर कॉस्ट और बेहतर टैक्स नीतियों के चलते भारत कंपनी के लिए एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बन गया है। कंपनी तेजी से मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है, और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है।
भारत के अलावा Apple ने वियतनाम को भी उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया है—वहां से Mac, iPad और Watch जैसे प्रोडक्ट अमेरिका में भेजे जा रहे हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए iPhone का एक बड़ा हिस्सा अब भी चीन से ही आता है।
अमेरिका में भी बड़ा निवेश करेगी Apple
भारत में निर्माण बढ़ाने के साथ-साथ Apple अमेरिका में भी निवेश के बड़े प्लान पर काम कर रही है। टिम कुक ने घोषणा की है कि अगले चार वर्षों में कंपनी अमेरिका में 500 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इसके तहत टेक्सास में नई AI सर्वर फैक्ट्री खोली जाएगी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग फंड को दोगुना किया जाएगा।
आगे की राह: चुनौतियों और अवसरों के बीच संतुलन
एप्पल के लिए यह समय चुनौतियों और संभावनाओं दोनों से भरा हुआ है। एक ओर जहां टैरिफ का बोझ कंपनी की लागत बढ़ा रहा है, वहीं भारत जैसे बाजार नए दरवाजे खोल रहे हैं। कुक के अनुसार, भारत iPhone के लिए सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल हो चुका है, और आने वाले वर्षों में यहां की भूमिका और भी अहम होगी।
टैरिफ की मार और राजनीतिक दबाव के बावजूद Apple का भारत में विस्तार इस बात का संकेत है कि कंपनी न केवल लागत में बचत चाहती है, बल्कि एशियाई बाजारों की डिमांड को लेकर भी बेहद गंभीर है। अब देखना यह है कि अमेरिकी प्रशासन की अगली नीति क्या मोड़ लाती है, और क्या Apple भारत में बने iPhone को वैश्विक सफलता की ओर ले जाने में कामयाब होती है।














