पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती घंटों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर दिखाया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को उन रुझानों से झटका लगता नजर आ रहा है, जिन पर अब तक उनकी पार्टी की मजबूत पकड़ मानी जाती रही थी। सुबह 8 बजे शुरू हुई काउंटिंग के पहले चार घंटों में ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कई सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाती दिखाई दी है।
सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत यह माना जा रहा है कि जिन मुस्लिम बहुल इलाकों को टीएमसी का सुरक्षित वोट बैंक समझा जाता था, वहां भी भाजपा ने अप्रत्याशित प्रदर्शन किया है। यह बदलाव कई स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी को आशंका थी कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण मुस्लिम वोटों पर असर पड़ सकता है, जबकि दूसरी ओर हिंदू मतदाताओं की बड़ी संख्या में भागीदारी इस चुनाव की दिशा बदलती नजर आ रही है। कुछ सीटों पर कांग्रेस की मौजूदगी ने भी टीएमसी के वोटों में विभाजन की स्थिति पैदा की है।
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भाजपा की बढ़त ने बढ़ाई चिंता
शुरुआती रुझानों में भाजपा ने कई ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में भी बढ़त बनाई है, जिन्हें पारंपरिक रूप से मुस्लिम बहुल माना जाता है। इनमें जंगीपुरा, मुर्शिदाबाद, मालदा, मोथाबाड़ी और रतुआ जैसी सीटें शामिल हैं, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इस बार हिंदू मतदाता बड़ी संख्या में भाजपा के पक्ष में एकजुट हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम वोटरों का समर्थन पूरी तरह एकतरफा टीएमसी को नहीं मिला, बल्कि कई जिलों—जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर—में वोटों का बंटवारा साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस की एंट्री से टीएमसी के वोट बैंक में दरार
जंगीपुरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नजीत बाग करीब 2915 वोटों से आगे चल रहे हैं। मुर्शिदाबाद में टीएमसी उम्मीदवार शाओनी सिंह रॉय, भाजपा के गौरी शंकर घोष से 22 हजार से अधिक वोटों से पीछे हैं, जबकि कांग्रेस ने यहां अलि सिद्दिकी को मैदान में उतारा था, जिससे वोटों का विभाजन और स्पष्ट हुआ।
मालदा सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार गोपाल चंद्र साह लगभग 300 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं मोथाबाड़ी, जो मुस्लिम बहुल सीट मानी जाती है, वहां भाजपा के निबार्ण घोष 5000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं। टीएमसी ने यहां इस्लाम नजरूल को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस के सयेम चौधरी को भी उल्लेखनीय वोट मिले हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है और टीएमसी को सीधा नुकसान दिखाई दिया है।
रतुआ सीट पर भी भाजपा का दबदबा, मुकाबला सीधा लेकिन झुकाव एकतरफा
रतुआ विधानसभा सीट पर टीएमसी के समर मुखर्जी और भाजपा के अभिषेक सिंघानिया के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन रुझानों में भाजपा 6 राउंड की गिनती के बाद 13 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रही है। यहां कांग्रेस ने आलम मोत्तकिन को उम्मीदवार बनाया था, जिससे कुछ हद तक वोटों का बिखराव भी देखने को मिला।
कुल रुझानों में भाजपा बहुमत के करीब, टीएमसी पीछे
ताजा आंकड़ों के अनुसार भाजपा 293 में से 181 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि टीएमसी लगभग 100 सीटों तक सिमटती दिख रही है। अभी पांच सीटों के रुझान आना बाकी हैं। बहुमत के लिए 147 सीटों का आंकड़ा जरूरी है, जिसे भाजपा पार करती नजर आ रही है।














