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सत्ता परिवर्तन के बाद बदले सुर... TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, पूर्व सांसद शांतनु सेन ने छोड़ा राष्ट्रीय प्रवक्ता पद

तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी नाराजगी के बीच पूर्व सांसद शांतनु सेन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरजी कर कांड, भ्रष्टाचार और पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 29 May 2026 8:16:11

सत्ता परिवर्तन के बाद बदले सुर... TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, पूर्व सांसद शांतनु सेन ने छोड़ा राष्ट्रीय प्रवक्ता पद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष लगातार खुलकर सामने आता दिख रहा है। हालिया चुनावी झटकों और विवादों के बीच अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली, आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले और कथित भ्रष्टाचार को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की है।

गुरुवार को दिए गए अपने इस्तीफे में शांतनु सेन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी का सार्वजनिक रूप से बचाव करना उनके लिए नैतिक रूप से संभव नहीं रह गया है। हालांकि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता नहीं छोड़ी है, लेकिन उनके बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बड़ा संकेत माना जा रहा है।

ममता बनर्जी को भेजा इस्तीफा, जनादेश का किया जिक्र

कोलकाता नगर निगम के पार्षद और पेशे से डॉक्टर रहे शांतनु सेन ने अपना इस्तीफा सीधे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजा। उन्होंने पत्र में लिखा कि विधानसभा चुनावों में जनता ने जो संदेश दिया है, उसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।

सेन ने कहा कि वह जनादेश का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता पद छोड़ रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “मैंने हमेशा पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम किया, लेकिन मौजूदा हालात में इस जिम्मेदारी को आगे जारी रखना उचित नहीं लगता।”

‘अब हर बात का बचाव करना अंतरात्मा को मंजूर नहीं’

अपने इस्तीफे में शांतनु सेन ने साफ शब्दों में कहा कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने पार्टी के पक्ष में कई बार सार्वजनिक मंचों और टीवी डिबेट्स में बयान दिए, जबकि निजी तौर पर वे कुछ मुद्दों से सहमत नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने संगठन के प्रति वफादारी निभाई।

उन्होंने लिखा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं जहां आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड, भर्ती घोटाले और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जनता का भरोसा कमजोर हुआ है और ऐसे मामलों का बचाव करना उनकी अंतरात्मा को स्वीकार नहीं है।

सेन ने कहा, “कई मौकों पर मुझे लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन मैंने पार्टी लाइन का समर्थन किया। अब परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि मैं सार्वजनिक रूप से इन मुद्दों का समर्थन नहीं कर सकता।”

आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामला बना बड़ा कारण

पिछले वर्ष कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे देश में भारी आक्रोश पैदा किया था। इस मामले को लेकर राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे थे।

घटना के बाद संस्थान में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर भी आवाजें उठने लगी थीं। शांतनु सेन, जो खुद आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े रहे हैं, उन चुनिंदा तृणमूल नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से इस मामले पर चिंता जताई थी।

उनके बयानों से पार्टी नेतृत्व असहज हो गया था और बाद में उन्हें ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, उनसे राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी वापस ले ली गई थी। हालांकि कुछ समय बाद पार्टी ने उन्हें फिर बहाल कर दिया था।

सत्ता परिवर्तन के बाद बदले सुर

बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद शांतनु सेन के रुख में और स्पष्टता देखने को मिली। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बधाई दी थी। इस कदम के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर काफी असहज स्थिति पैदा हो गई थी।

बुधवार को उन्होंने यह भी कहा कि आरजी कर मामले से जुड़ी किसी भी जांच में वे नई सरकार और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान को लेकर भी पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई।

TMC में लगातार उठ रही बगावत की आवाज

शांतनु सेन का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर कई नेता खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। हाल के दिनों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पार्षदों ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

बुधवार को ही पार्टी प्रवक्ता और कोलकाता नगर निगम के पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने लोक लेखा समिति के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने पार्टी प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी छोड़ दी। वहीं एक अन्य पार्षद सुशांत घोष ने नगर अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पार्टी में असंतोष के संकेत दिए।

इसके अलावा लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी हाल ही में संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दिया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के भीतर काम करने के तरीके और कुछ नेताओं के रवैये को लेकर खुलकर नाराजगी जताई थी।

चुनावी हार के बाद बढ़ा दबाव


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया चुनावों में मिले झटकों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर दबाव लगातार बढ़ रहा है। पार्टी के कई नेता अब खुलकर अपनी राय रख रहे हैं और संगठन के भीतर फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शांतनु सेन का इस्तीफा केवल एक पद छोड़ने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पार्टी के अंदर बढ़ती बेचैनी और असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर और भी राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।

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