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ममता बनर्जी को लगा एक और बड़ा झटका, 6 बार के विधायक और पूर्व मंत्री मानस भुइयां ने छोड़ा तृणमूल कांग्रेस

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। छह बार के विधायक और पूर्व मंत्री मानस भुइंया ने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी छोड़ते हुए कहा कि टीएमसी अपने मूल राजनीतिक सिद्धांतों से भटक रही है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया। भुइंया ने यह भी साफ किया कि वे राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं और सक्रिय रूप से बने रहेंगे। उनके अगले कदम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे कांग्रेस वापसी या किसी नए राजनीतिक गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 14 Jun 2026 1:07:59

ममता बनर्जी को लगा एक और बड़ा झटका, 6 बार के विधायक और पूर्व मंत्री मानस भुइयां ने छोड़ा तृणमूल कांग्रेस

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। छह बार विधायक रह चुके और पूर्व मंत्री मानस भुइंया ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजते हुए पार्टी से अलग होने की घोषणा की। भुइंया ने आरोप लगाया कि जिस राजनीतिक विचारधारा और सिद्धांतों के आधार पर वे टीएमसी में शामिल हुए थे, पार्टी अब उन मूल्यों से दूर होती जा रही है। इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है।

राजनीति छोड़ने से इनकार, अगले कदम पर सस्पेंस

मीडिया से बातचीत में मानस भुइंया ने स्पष्ट किया कि वह इस इस्तीफे के बावजूद राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे और आगे भी अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। हालांकि, उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया, जिससे इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या वे फिर से कांग्रेस में वापसी करेंगे या पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में किसी नए राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनेंगे।

सबांग सीट से हार के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

गौरतलब है कि मानस भुइंया लंबे समय तक ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में शामिल रहे हैं। इस बार उन्हें सबांग विधानसभा क्षेत्र से हार का सामना करना पड़ा है। अविभाजित मिदनापुर जिले के प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती रही है और उन्होंने कई वर्षों तक सबांग का प्रतिनिधित्व भी किया है।

कांग्रेस में अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने राज्य अध्यक्ष और विधानसभा में विपक्ष के नेता जैसी अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं। इसके बाद 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

टीएमसी में भूमिका और मौजूदा संकट

टीएमसी में शामिल होने के बाद मानस भुइंया ने अपने क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत करने में अहम योगदान दिया। बाद में उन्हें राज्य कैबिनेट में मंत्री पद भी मिला और वे क्षेत्रीय राजनीति में पार्टी का एक मजबूत चेहरा बनकर उभरे।

उनका यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टीएमसी पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और अंदरूनी असंतोष का सामना कर रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी रुख अपना चुके हैं, जबकि केवल 8 सांसद ही ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इसके अलावा चार राज्यसभा सांसदों के भी पार्टी से अलग होने की खबरें सामने आई हैं।

बढ़ता अंदरूनी दबाव और गुटबाजी


पार्टी में अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है। 15 वर्षों से सत्ता में रही टीएमसी अब अपने ही नेताओं की नाराजगी का सामना कर रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ममता बनर्जी को ही अपना नेता मानते हैं, लेकिन पार्टी में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर असहमति जताई है।

सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी के साथ करीब 60 टीएमसी विधायकों का समर्थन भी बताया जा रहा है, जिससे पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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