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ममता सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पर शुभेंदु ने लगाई रोक, अडाणी को पोर्ट के लिए देंगे नई जमीन

पश्चिम बंगाल सरकार ने ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जमीन की कमी के कारण ताजपुर में पोर्ट निर्माण पर रोक लग गई है। अब सरकार ने अडाणी समूह को दादनपात्रबार में नई जमीन का प्रस्ताव दिया है, जहां इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नए सिरे से शुरू किया जा सकता है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 05 Jun 2026 8:14:25

ममता सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पर शुभेंदु ने लगाई रोक, अडाणी को पोर्ट के लिए देंगे नई जमीन

पश्चिम बंगाल की बहुचर्चित ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। लंबे समय से चर्चा में रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब ताजपुर में आगे बढ़ाना संभव नहीं माना जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जमीन की उपलब्धता और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ताजपुर में बंदरगाह निर्माण की योजना व्यवहारिक नहीं रह गई है। इसके चलते सरकार अब इस परियोजना को पूर्व मेदिनीपुर जिले के ही दादनपात्रबार क्षेत्र में स्थानांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंध में उनकी हाल ही में अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के प्रबंध निदेशक करण अडाणी के साथ विस्तृत बातचीत हुई है। बैठक में परियोजना के भविष्य, भूमि उपलब्धता और संभावित नए स्थान पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि यदि उपयुक्त जमीन और आधारभूत संरचना उपलब्ध हो तो यह परियोजना राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है।

ताजपुर में पोर्ट निर्माण को बताया अव्यावहारिक

परियोजना की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ताजपुर में बंदरगाह विकसित करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अडाणी समूह पहले ही इस परियोजना से दूरी बना चुका था क्योंकि जिस स्तर की भूमि और बुनियादी ढांचे की जरूरत थी, वह वहां उपलब्ध नहीं हो पा रहा था।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसी भी बड़े समुद्री बंदरगाह के लिए मजबूत रेल संपर्क, विशाल वेयरहाउस नेटवर्क और हजारों एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। ताजपुर में इन बुनियादी शर्तों को पूरा करना संभव नहीं हो सका। ऐसे में परियोजना लगातार अटकी रही और आगे नहीं बढ़ पाई।

सरकारी मूल्यांकन में भी सामने आई जमीन की कमी

राज्य सरकार द्वारा कराए गए आंतरिक मूल्यांकन में भी यही निष्कर्ष सामने आया है कि ताजपुर में पोर्ट निर्माण के लिए पर्याप्त सरकारी भूमि मौजूद नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के मार्गदर्शन में उद्योग विभाग ने इस परियोजना की व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन किया था।

उद्योग सचिव वंदना यादव के नेतृत्व में तैयार रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावित क्षेत्र में सरकारी जमीन लगभग न के बराबर है। इस कारण परियोजना को आगे बढ़ाना व्यावहारिक नहीं माना गया। सरकार का कहना है कि किसी भी बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए पहले भूमि संबंधी चुनौतियों का समाधान जरूरी है।

दादनपात्रबार को बनाया गया नया विकल्प

सरकार ने अब ताजपुर के स्थान पर दादनपात्रबार को संभावित नए स्थल के रूप में चिन्हित किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह इलाका ताजपुर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहले नमक उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां संचालित होती थीं।

उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में करीब 1,700 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जो बड़े पैमाने पर औद्योगिक और बंदरगाह परियोजना के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने करण अडाणी के समक्ष इस स्थान का प्रस्ताव रखा है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है और आगे की प्रक्रिया पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी रहेगी।

केंद्र के साथ समन्वय पर जोर

यह घोषणा ऐसे समय में हुई जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर के साथ राज्य सचिवालय में बैठक की। बैठक में समुद्री अवसंरचना, निवेश और बंदरगाह विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ राजस्व साझाकरण की व्यवस्था के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना है कि यह परियोजना केवल एक बंदरगाह नहीं बल्कि रोजगार, व्यापार और क्षेत्रीय विकास का बड़ा अवसर बन सकती है।

ममता सरकार के दौर में बनी थी योजना

ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना की नींव पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। उस समय इसे राज्य की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक माना गया था। अनुमान था कि इस परियोजना में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश आएगा।

इसके अलावा सड़क, रेल, गोदाम और अन्य सहायक ढांचों के विकास के जरिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश आकर्षित होने की संभावना जताई गई थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी अडाणी समूह को सौंपी गई थी और इसे बंगाल के औद्योगिक विकास के लिए गेम चेंजर माना जा रहा था।

2022 में मिला था लेटर ऑफ इंटेंट

अक्टूबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वयं करण अडाणी को ताजपुर पोर्ट परियोजना के लिए लेटर ऑफ इंटेंट सौंपा था। उस समय इसे राज्य में बड़े निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया था।

हालांकि परियोजना को लेकर कई दौर की चर्चाएं और घोषणाएं हुईं, लेकिन जमीन, मंजूरियों और अन्य तकनीकी कारणों के चलते निर्माण कार्य कभी शुरू नहीं हो सका। समय बीतने के साथ परियोजना की प्रगति लगभग ठहर सी गई।

मंजूरियों और शर्तों के कारण बढ़ी मुश्किलें

सूत्रों के मुताबिक परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से मिलने वाली अनिवार्य मंजूरियां थीं। अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन को गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और जहाजरानी मंत्रालय से कई स्तरों पर स्वीकृतियां प्राप्त करनी थीं।

बताया जाता है कि कंपनी कुछ आवश्यक शर्तों को समय पर पूरा नहीं कर सकी, जिसके कारण मंजूरी प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई। नतीजतन परियोजना लगातार देरी का शिकार होती रही और जमीन पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।

2025 में समाप्त हुआ पुराना समझौता

लगातार हो रही देरी और अनिश्चितता के बीच जून 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने अडाणी समूह के साथ हुए पुराने समझौते को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया था। इस फैसले के साथ APSEZ और राज्य सरकार के बीच लगभग चार वर्षों से चल रहा जुड़ाव खत्म हो गया।

इसके बाद दिसंबर 2025 में 99 वर्ष की लीज अवधि के साथ एक नया वैश्विक टेंडर जारी किया गया था, ताकि परियोजना को नए सिरे से आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन बाद में पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) ने उस टेंडर को भी रद्द कर दिया।

अब राज्य सरकार दादनपात्रबार में उपलब्ध भूमि के आधार पर इस परियोजना को नए स्वरूप में पुनर्जीवित करने की तैयारी कर रही है। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं तो यह बंदरगाह परियोजना एक बार फिर बंगाल के औद्योगिक और समुद्री विकास की प्रमुख योजनाओं में शामिल हो सकती है।

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