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ममता बनर्जी ने वकील की पोशाक में की कोर्ट में पैरवी, बार काउंसिल ने मांगा प्रैक्टिस सर्टिफिकेट

ममता बनर्जी के वकील की पोशाक में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बड़ा कदम उठाया है। बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से उनके वकालत पंजीकरण, प्रैक्टिस और सर्टिफिकेट से जुड़ी पूरी रिपोर्ट 48 घंटे में मांगी है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 14 May 2026 7:58:55

ममता बनर्जी ने वकील की पोशाक में की कोर्ट में पैरवी, बार काउंसिल ने मांगा प्रैक्टिस सर्टिफिकेट

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के हालिया अदालत में पेश होने के बाद अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार को बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को निर्देश जारी करते हुए कहा कि ममता बनर्जी के वकील के तौर पर पंजीकरण, प्रैक्टिस की स्थिति और संबंधित दस्तावेजों पर 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाए। यह कदम तब उठाया गया जब ममता बनर्जी वकीलों की पारंपरिक पोशाक पहनकर Calcutta High Court में एक मामले की सुनवाई के दौरान नजर आईं।

दरअसल, ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों के बाद कथित हिंसा और तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालयों पर हुए हमलों से जुड़े मामले में अदालत में अपनी दलीलें पेश की थीं। इस दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे। अदालत में उनकी उपस्थिति के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी नेता को सक्रिय रूप से वकालत करने की अनुमति है। इसी को लेकर अब बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से तथ्यात्मक जानकारी तलब की है।

बीसीआई द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि परिषद मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई उन खबरों का संज्ञान ले रही है, जिनमें दावा किया गया कि ममता बनर्जी अदालत में अधिवक्ता के रूप में पेश हुईं। पत्र में स्पष्ट किया गया कि 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री पद संभालने के दौरान उनकी कानूनी प्रैक्टिस की स्थिति क्या रही, इस संबंध में रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। परिषद ने खास तौर पर उनके एनरोलमेंट, बार लाइसेंस के निलंबन, पुनः सक्रिय होने और प्रैक्टिस सर्टिफिकेट से जुड़ी सभी जानकारियां मांगी हैं।

बार काउंसिल के नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति किसी संवैधानिक पद पर कार्यरत होता है या किसी लाभ के पद पर नियुक्त होता है, तो आमतौर पर उसे अपनी वकालत का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कराना पड़ता है। पद छोड़ने के बाद ही दोबारा लाइसेंस सक्रिय कराकर अदालत में प्रैक्टिस की जा सकती है। ऐसे में बीसीआई यह जानना चाहती है कि मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी की वकालत की स्थिति क्या थी और क्या उन्होंने नियमानुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया था।

बीसीआई के प्रधान सचिव श्रीरामंतो सेन की ओर से जारी पत्र में यह भी कहा गया कि फिलहाल परिषद इस बात पर कोई कानूनी राय नहीं दे रही कि अदालत में उनकी उपस्थिति वैध थी या नहीं। हालांकि, रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। इसी कारण पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को दो दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

यह पूरा मामला तृणमूल कांग्रेस की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसे अधिवक्ता शीर्षन्या बंद्योपाध्याय ने दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्यभर में तृणमूल कांग्रेस के कार्यालयों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कई पार्टी समर्थकों पर हमले हुए और कुछ लोगों को कथित तौर पर अपने घर छोड़ने तक के लिए मजबूर होना पड़ा। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच अब यह मामला कानूनी और संवैधानिक बहस का विषय बन गया है।

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