पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए कई अहम पदों पर फेरबदल किया है। पार्टी की युवा और महिला इकाइयों में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिसमें कई प्रमुख नेताओं को उनके पदों से हटाकर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।
युवा और महिला संगठन में नए चेहरे
पार्टी सूत्रों के अनुसार, टीएमसी नेतृत्व ने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से युवा और महिला मोर्चे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कुछ दिन पहले ही सांसद सायोनी घोष को पार्टी की युवा इकाई का अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अर्नब बनर्जी को युवा विंग की कमान सौंपी गई है।
इसी तरह महिला संगठन में भी बड़ा बदलाव किया गया है। तृणमूल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला राय को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। अब कालिगंज से विधायक अलिफा अहमद को महिला विंग की नई अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी का मानना है कि नए नेतृत्व से संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूती मिलेगी।
सायोनी घोष और माला राय को लेकर बढ़ीं चर्चाएं
संगठनात्मक बदलावों के बीच सायोनी घोष और माला राय को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। पार्टी के अंदर यह चर्चा है कि दोनों नेताओं का नाम उन सांसदों के समूह से जोड़ा जा रहा है, जिन्हें टीएमसी का असंतुष्ट या बागी खेमे का हिस्सा माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि लोकसभा में पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व से नाराज हैं और वे संसद में अलग पहचान की मांग को लेकर सक्रिय हैं। सूत्रों के मुताबिक यह समूह जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी बात रखने की तैयारी में है। दावा किया जा रहा है कि इस समूह के साथ बड़ी संख्या में सांसद जुड़े हुए हैं और उनमें कुछ प्रमुख नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
पार्टी के भीतर मतभेदों पर बढ़ी चिंता
तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि हालिया बदलावों पर चर्चा पहले ही पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में हो चुकी थी और उसी के आधार पर ये फैसले लिए गए।
उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व उन नेताओं से नाराज है जो संगठन की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपना रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों ने टीएमसी के अंदर मौजूद मतभेदों को और अधिक उजागर कर दिया है।
इसी बीच पार्टी के असंतुष्ट खेमे से जुड़े कुछ नेताओं ने भी भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर संकेत दिए हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया है।
पहले भी भंग की गई थीं सभी कमेटियां
गौरतलब है कि इससे पहले भी ममता बनर्जी संगठन में व्यापक बदलाव कर चुकी हैं। जून के पहले सप्ताह में उन्होंने पार्टी की विभिन्न समितियों और फ्रंटल संगठनों को भंग कर नई संरचना तैयार करने का फैसला लिया था।
उस दौरान कई पुराने नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी गई थीं और संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश की गई थी। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में अभिषेक बनर्जी को फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नेतृत्व का मानना था कि नए ढांचे के जरिए संगठन को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
कुणाल घोष को मिली नई जिम्मेदारी
ताजा फेरबदल में टीएमसी सांसद कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह जिम्मेदारी पहले वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के पास थी। पार्टी के फैसले के बाद कुणाल घोष ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है और वे संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल के दिनों में सुदीप बंद्योपाध्याय की कुछ राजनीतिक गतिविधियों ने पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचा था। ऐसे में इस बदलाव को भी व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।
इसके अलावा वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को लोकसभा में पार्टी इकाई का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में नेतृत्व अपने भरोसेमंद नेताओं को अहम जिम्मेदारियां देकर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इन बदलावों का टीएमसी की आंतरिक राजनीति और आगामी रणनीति पर क्या असर पड़ता है।














