पश्चिम बंगाल की सियासत में बाबरी मस्जिद निर्माण का ऐलान कर सुर्खियों में आए हुमायूं कबीर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है राज्य में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की चुनावी हार, जिस पर उन्होंने खुलकर खुशी जाहिर की है। अपने बयानों में उन्होंने साफ कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी की सत्ता से विदाई “सही और जरूरी कदम” था। बाबरी मस्जिद विवाद के बाद ही टीएमसी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था, लेकिन तब तक राज्य की राजनीति में ध्रुवीकरण की स्थिति काफी बढ़ चुकी थी, जिसका असर चुनावी समीकरणों पर भी पड़ा।
एएनआई से बातचीत में हुमायूं कबीर ने टीएमसी की हार को जनता का फैसला बताते हुए बंगाल के मतदाताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगातार बढ़ते रहे। उनके अनुसार, “जो हुआ अच्छा हुआ, यह पहले ही होना चाहिए था। ममता बनर्जी ने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए अपने परिवार और करीबी लोगों को राजनीतिक ताकत दी और जनता के हितों की अनदेखी हुई।”
उन्होंने आगे तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में राज्य में जितना भ्रष्टाचार हुआ, उसकी तुलना औपनिवेशिक दौर से भी की जा सकती है। उनके मुताबिक, “ब्रिटिश शासन ने जितना शोषण सौ साल में किया, उससे कहीं अधिक नुकसान पिछले डेढ़ दशक में हुआ है।” इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि इस बार के नतीजों ने जनता की नाराजगी को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया है।
‘भ्रष्टाचार का जवाब मिला’ — हुमायूं कबीर
एक अन्य सवाल के जवाब में कबीर ने कहा कि इस चुनावी परिणाम को वे जनता की प्रतिक्रिया के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति हर किसी का अधिकार है, लेकिन जनता ने यह तय कर दिया है कि कौन सही दिशा में काम कर रहा था और कौन नहीं। उनके अनुसार, “भ्रष्टाचार में डूबी व्यवस्था को जनता ने करारा जवाब दिया है।”
चुनाव परिणामों के बीच उन्होंने यह भी दावा किया कि वह दो सीटों पर जीत की स्थिति में हैं और जल्द ही दोनों जगहों से प्रमाणपत्र प्राप्त करेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस सीट को अपने पास रखेंगे और किसे खाली करेंगे, लेकिन संकेत दिया कि इस पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।
टीएमसी की हार में क्यों चर्चा में आए हुमायूं कबीर
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के पीछे कई राजनीतिक कारण गिनाए जा रहे हैं, जिनमें हुमायूं कबीर का नाम भी लगातार चर्चा में रहा है। टीएमसी के विधायक रहते हुए उन्होंने बाबरी मस्जिद निर्माण का ऐलान कर राज्य की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। शुरुआत में पार्टी ने इस मुद्दे से दूरी बनाए रखी, लेकिन जैसे-जैसे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा, टीएमसी ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
इसके बावजूद हुमायूं कबीर ने प्रशासनिक समर्थन के बीच बाबरी मस्जिद की नींव रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई, जिससे राज्य में धार्मिक और राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया और इसका अप्रत्यक्ष लाभ भाजपा को मिला।
नई पार्टी और गठबंधन विवाद
टीएमसी से अलग होने के बाद हुमायूं कबीर ने अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन किया और एआईएमआईएम के साथ मिलकर कई सीटों पर चुनावी उम्मीदवार उतारे। हालांकि चुनाव के बीच ही एक वायरल वीडियो सामने आने के बाद एआईएमआईएम ने गठबंधन से खुद को अलग कर लिया।
उस वीडियो में कबीर को कथित रूप से भाजपा से संपर्क को लेकर बयान देते हुए दिखाया गया था, जिसे लेकर विवाद बढ़ गया। बाद में उन्होंने इस वीडियो को फर्जी और भ्रामक बताते हुए सभी आरोपों से इनकार किया। इसके बाद भी यह मामला चुनावी चर्चा का हिस्सा बना रहा और पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसका असर साफ तौर पर देखा गया।














