
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में सोमवार को प्रकृति ने विकराल रूप दिखाया। हर्षिल घाटी के समीप खीर गाड़ क्षेत्र में स्थित धराली गांव में अचानक बादल फटने की घटना ने तबाही का नया अध्याय लिख दिया। इस आपदा में पहाड़ों से भारी मात्रा में आया मलबा गांव के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले गया, जिससे लगभग 20 से 25 होटल, होम स्टे और कई आवासीय भवन पूरी तरह जमींदोज हो गए।
जिला प्रशासन से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में कई लोग लापता हैं, वहीं चार लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। हालांकि यह संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सेना और आईटीबीपी की टीमों ने मोर्चा संभालते हुए तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
क्षणभर में उजड़ गया गांव, खौफनाक दृश्य कैमरे में कैद
घटना सोमवार दोपहर लगभग 1:30 बजे की बताई जा रही है। स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब बादल फटा तो तेज गर्जना और मलबे की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। ऊंचाई से आया भारी मलबा इतनी तेज़ी से गांव में घुसा कि लोग समझ भी नहीं पाए और देखते ही देखते पूरा इलाका मलबे में समा गया।
धराली गांव, जो गंगोत्री यात्रा मार्ग पर स्थित है, में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए कई होटल और होम स्टे बने हुए हैं। आमतौर पर यहां रौनक रहती है, लेकिन मानसून के चलते पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, जो कि इस आपदा में एकमात्र राहत भरी बात मानी जा रही है।
बादल फटने से बाजार क्षेत्र भी मलबे के नीचे दब गया है। मौके पर घोड़े, खच्चर, वाहन आदि भी इस मलबे में फंस गए हैं। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि मृतकों की संख्या अभी सीमित है लेकिन राहत कार्यों के दौरान और लोगों के शव मिलने की संभावना बनी हुई है।
Dehradun, Uttarakhand: Before and after picture of Dharali in Harsil, which has been hit by a cloudburst
— ANI (@ANI) August 5, 2025
Senior officials, including the Principal Secretary to Chief Minister, Commissioner of Garhwal Division, are monitoring the situation at the State Disaster Operations Centre… pic.twitter.com/bkXKH59Ac2
सीएम धामी ने जताया शोक, केंद्र सरकार भी सक्रिय
इस भीषण आपदा पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुख जताया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत व बचाव कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और युद्धस्तर पर अभियान चलाया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी और जिला प्रशासन के साथ-साथ अन्य एजेंसियों को भी राहत अभियान में झोंक दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मामले पर मुख्यमंत्री से बात की है और केंद्र से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
सेना और आपदा राहत बल मैदान में उतरे
भारतीय सेना की 'आइबेक्स ब्रिगेड' और 'सूर्य कमान' की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और हालात का जायजा लेकर राहत कार्य शुरू कर दिया। सेना के जवान मलबे में फंसे लोगों को निकालने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
वहीं एनडीआरएफ की चार टीमें घटनास्थल के लिए रवाना की गई हैं, जिनमें प्रशिक्षित जवान और आधुनिक उपकरण शामिल हैं। SDRF भी स्थानीय पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर राहत अभियान चला रही है।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि समय पर राहत पहुंचाने की कोशिश की जा रही है और प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
हालात अब भी गंभीर, बारिश बनी चिंता
वर्तमान में इलाके में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है, जिससे राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है। बारिश के कारण पहाड़ों से और भी मलबा गिरने की आशंका है, जिससे बचाव कार्य में लगे लोगों की सुरक्षा भी चुनौती बनी हुई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां तक पहुंच बनाना कठिन हो रहा है। ग्रामीणों की मदद से स्थानीय प्रशासन राहत कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, लेकिन चुनौती अब भी बरकरार है।
प्रकृति के सामने असहाय हुआ इंसान
उत्तरकाशी में आई इस आपदा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रकृति के क्रोध के सामने मनुष्य की तैयारियां कितनी भी मजबूत क्यों न हों, वो अक्सर अपर्याप्त साबित होती हैं। धराली जैसे शांत गांव का मलबे में तब्दील हो जाना न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक सीख है कि प्रकृति के साथ संतुलन और सतर्कता बनाए रखना कितना जरूरी है।














