
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह टिप्पणी न केवल असंसदीय और आपत्तिजनक है, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस को इसके लिए पूरे देश से तुरंत माफी मांगनी चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान सीमापार से घुसपैठ के मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए विवादास्पद शब्दों का प्रयोग किया। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि इस तरह की टिप्पणियाँ “अक्षम्य और घोर निंदनीय” हैं और यह दर्शाती हैं कि टीएमसी के राजनीतिक दृष्टिकोण में लोकतांत्रिक मूल्यों का कोई सम्मान नहीं है।
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि यह टिप्पणी केवल टीएमसी के कुसंस्कारों को उजागर नहीं करती, बल्कि उन सभी भारतीयों का अपमान करती है जो लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। उनका कहना था कि पार्टी को तुरंत देशभर से माफी मांगनी चाहिए और ऐसी भाषा का दोबारा प्रयोग नहीं होना चाहिए।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी महुआ मोइत्रा के बयान की आलोचना की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक मुख्यमंत्री के रूप में हर बयान पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है, लेकिन वीडियो देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि यह बयान उनके मानसिक दृष्टिकोण का परिचायक है। सरमा ने कहा कि इस पर और टिप्पणी करने का कोई लाभ नहीं है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इस मामले में कहा कि महुआ मोइत्रा का बयान किसी भी लोकतांत्रिक राजनीति पर कलंक है। उन्होंने कहा कि यह भाषा न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश के लोगों का अपमान करती है और टीएमसी समेत ‘इंडिया’ ब्लॉक की हताशा, कुंठा और अराजक मानसिकता को उजागर करती है। उन्होंने ममता बनर्जी से सवाल किया कि क्या उनकी पार्टी में लोकतांत्रिक बहस की जगह सिर्फ हिंसक और जहरीली भाषा रह गई है।
महुआ मोइत्रा के बयान के बाद दिल्ली में भाजपा विधायक रविंद्र नेगी और पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के एक पार्टी कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। यह मामला अब चुनावी और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है और आगामी दिनों में इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।














