
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए लंबे समय से चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान का ड्राफ्ट आखिरकार मंगलवार को जारी कर दिया गया। इस ड्राफ्ट के सामने आते ही प्रदेश की चुनावी तस्वीर को लेकर कई अहम तथ्य उजागर हुए हैं। प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 17 जिले ऐसे हैं, जहां 20 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। आंकड़ों के लिहाज से सबसे ज्यादा असर राजधानी लखनऊ में देखने को मिला है, जहां 30.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम कटे हैं। वहीं, सबसे कम कटौती महोबा जिले में दर्ज की गई है, जहां यह आंकड़ा 12.42 प्रतिशत रहा।
ड्राफ्ट के प्रकाशन के साथ ही अब दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो एक महीने तक यानी छह फरवरी तक चलेगी। इस अवधि में मतदाताओं के पास अपने नाम जोड़वाने, संशोधन कराने या आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर रहेगा। मतदाता सूची बीएलओ के पास उपलब्ध कराई गई है, ताकि लोग आसानी से उसका सत्यापन कर सकें। गौर करने वाली बात यह है कि एसआईआर की प्रक्रिया मूल रूप से 11 दिसंबर को पूरी होनी थी, लेकिन जब यह सामने आया कि लगभग 2.97 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो रहे हैं, तो राज्य सरकार ने 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद गणना चरण को 26 दिसंबर तक बढ़ाया गया, जिसके दौरान करीब नौ लाख अतिरिक्त फॉर्म भरे गए।
प्रदेश में कुल 15 करोड़ 44 लाख मतदाताओं में से एसआईआर के तहत 2 करोड़ 88 लाख 75 हजार 230 मतदाता ऐसे पाए गए, जो या तो अनुपस्थित थे, स्थानांतरित हो चुके थे, मृत घोषित हुए या फिर डुप्लीकेट श्रेणी में आए। इन सभी के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत है। इसके अलावा 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता भी हैं, जिनका वर्ष 2003 की मतदाता सूची में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में अब चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे। इस पूरी कवायद के बाद प्रदेश की मतदाता सूची में अब 12.55 करोड़ मतदाता शेष रह गए हैं। ड्राफ्ट सूची जारी होते ही प्रमुख राजनीतिक दलों को भी इसकी प्रतियां उपलब्ध करा दी गई हैं।
अगर अलग-अलग श्रेणियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 2.17 करोड़ मतदाता स्थानांतरित या अनुपस्थित पाए गए हैं। इसके अलावा 46.23 लाख नाम मृत मतदाताओं के हैं, 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए, जबकि 7.57 लाख मतदाता ऐसे रहे जिन्होंने तय समय सीमा में अपने फॉर्म जमा नहीं किए।
राजधानी लखनऊ इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां 12,00,138 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 30.04 प्रतिशत है। इसके बाद गाजियाबाद में 8,18,139 नाम यानी 28.83 प्रतिशत, बलरामपुर में 4,11,200 नाम यानी 25.98 प्रतिशत, कानपुर नगर में 9,02,148 नाम यानी 25.50 प्रतिशत और प्रयागराज में 11,56,305 नाम यानी 24.64 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। इन जिलों में कटौती का प्रतिशत प्रदेश के औसत से कहीं अधिक रहा है।
जिलावार आंकड़ों की बात करें तो मेरठ में 6,65,635 (24.65 प्रतिशत), गौतम बुद्ध नगर में 4,47,471 (23.98 प्रतिशत), आगरा में 8,36,943 (23.25 प्रतिशत), बरेली में 7,14,753 (20.99 प्रतिशत), बदायूं में 4,92,995 (20.39 प्रतिशत), शाहजहांपुर में 5,03,922 (21.76 प्रतिशत), फर्रुखाबाद में 2,90,824 (20.80 प्रतिशत), कन्नौज में 2,78,095 (21.57 प्रतिशत), सिद्धार्थनगर में 3,98,900 (20.33 प्रतिशत), बहराइच में 5,41,328 (20.44 प्रतिशत), हापुड़ में 2,57,903 (22.30 प्रतिशत) और संभल में 3,18,601 (20.29 प्रतिशत नाम कटे हैं।
वहीं दूसरी ओर, कुछ जिलों में मतदाता सूची से नाम हटने की संख्या अपेक्षाकृत कम रही है। महोबा में 85,352, हमीरपुर में 90,560, ललितपुर में 95,447, चित्रकूट में करीब एक लाख, श्रावस्ती में 1.34 लाख, शामली में 1.63 लाख, कासगंज में 1.72 लाख, बांदा में 1.75 लाख, बागपत में 1.77 लाख और अमरोहा में 1.81 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इन दस जिलों को सबसे कम कटौती वाले जिलों की श्रेणी में रखा गया है।
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब सभी की निगाहें दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पर टिकी हैं। चुनाव आयोग और प्रशासन का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न कटे, इसके लिए हर स्तर पर सुधार का पूरा अवसर दिया जा रहा है। दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जो आगामी चुनावों के लिए आधार बनेगी और प्रदेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।














