
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुई अहम बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। करीब आधे घंटे तक चली इस हाई-लेवल मीटिंग में यूपी के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर गहन चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, आने वाले कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है, ताकि राज्य के अलग-अलग वर्गों और इलाकों को उचित भागीदारी मिल सके।
बैठक के दौरान SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर मंथन हुआ। जानकारी के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसे नाम सूची से बाहर हो गए हैं, जो परंपरागत रूप से बीजेपी के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों से जुड़े रहे हैं। इसे लेकर पार्टी के भीतर चिंता जाहिर की गई है और इस पर रणनीति दोबारा तय करने की जरूरत महसूस की गई। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व की पहले से दी गई हिदायतों के बावजूद जमीनी स्तर पर कई नेताओं ने SIR को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया, जिसका असर अब सामने आ रहा है।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शाम 3:30 बजे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात करेंगे। यह बैठक ऐसे वक्त में हो रही है, जब यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं चरम पर हैं और सियासी गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं।
Chief Minister of Uttar Pradesh, Shri @myogiadityanath, met Prime Minister @narendramodi.@CMOfficeUP pic.twitter.com/N0CuzsTSXo
— PMO India (@PMOIndia) January 5, 2026
यूपी मंत्रिमंडल में बदलाव की रूपरेखा तैयार
वर्तमान में योगी सरकार के मंत्रिमंडल में पहले 54 मंत्री शामिल थे, लेकिन 6 पद पहले से खाली चल रहे थे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जितेंद्र प्रसाद और अनूप प्रधान के केंद्र में मंत्री बनने से प्रदेश मंत्रिमंडल में रिक्तियों की संख्या और बढ़ गई। ऐसे में माना जा रहा है कि नए चेहरों को जगह देने के साथ-साथ कुछ पुराने चेहरों की भूमिका में भी बदलाव किया जा सकता है। चर्चा है कि प्रदेश बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को नई टीम में शामिल किया जा सकता है।
इसके अलावा कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि संगठन से जुड़े कुछ नेताओं को सरकार में लाने की तैयारी भी हो सकती है। यह अदला-बदली संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने के उद्देश्य से की जा सकती है।
कुछ मंत्रियों को मिल सकता है बड़ा दायित्व
सूत्रों के मुताबिक, कुछ राज्य मंत्रियों को पदोन्नत कर स्वतंत्र प्रभार सौंपा जा सकता है। साथ ही विभिन्न बोर्ड और निगमों में भी नए चेहरों का समायोजन होने की संभावना है। पश्चिमी यूपी के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वी यूपी से आते हैं। हाल ही में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक का असर भी संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में देखने को मिल सकता है।
2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी पश्चिमी यूपी के कई प्रभावशाली चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी का फोकस चुनाव से पहले एक संतुलित, मजबूत और चुनावी दृष्टि से सक्षम टीम तैयार करने पर है, ताकि आने वाले चुनावी मुकाबले में किसी भी मोर्चे पर कमजोरी न रह जाए।














