
समाजवादी पार्टी (सपा) में वरिष्ठ नेता आजम खान और रामपुर के सांसद मोहिब्बुल्ला नदवी के बीच चल रही विवाद की कहानी फिर से सुर्खियों में आ गई है। नदवी ने आजम खान पर कड़ा पलटवार किया और साफ कहा कि उनकी शराफत को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह बुजुर्गों का सम्मान करते हैं, लेकिन हर किसी को अपनी गलतियों को सुधारने की ज़रूरत होती है।
पिछले बुधवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर का दौरा किया और आजम खान से मुलाकात की। इस मुलाकात में आजम की शर्त थी कि कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं होगा। नदवी के मुताबिक, इस शर्त का इशारा उनके लिए था।
एक निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में नदवी ने कहा कि उन्हें आजम खान के जानने या न जानने से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने बताया, “रामपुर की 25 लाख आबादी ने मुझे चुना है। जनता मुझे जानती है, और यही मेरे लिए गर्व की बात है।” सांसद ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने कई बार आजम खान से मिलने की कोशिश की। ईद के दिन वह खुद मिलने गए और संदेश भी भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जेल से रिहाई के बाद भी उन्होंने पहल की, पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। नदवी ने कहा, “अब मैं क्या करूँ?”
नदवी ने अपने लहजे में नसीहत दी कि बड़े नेताओं को समझना चाहिए कि जनता सबसे बड़ी है। उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि उन्हें मुझे नहीं जानते, मैं साफ कर दूँ कि मेरी सात पीढ़ियों के बुजुर्ग रामपुर में दफन हैं और उनका संबंध बिजनौर से रहा। वह आज भी वहां के नेताओं को सम्मान देते हैं।
सांसद ने जोर देकर कहा, “नवाब बड़े हों या छोटे, यह जनता तय करती है। कोई व्यक्ति बड़ा नहीं होता, जनता बड़ी होती है।” उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें रामपुर की प्रतिनिधि के रूप में मैदान में उतारा और महज 19 दिनों में स्थानीय जनता ने उन्हें अपना नेता चुना। इसलिए किसी शख्स के जानने-न-जानने से उनके काम या प्रतिष्ठा पर कोई असर नहीं पड़ता।














