
लखनऊ में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब बहुजन समाज पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। यह औपचारिक सदस्यता ग्रहण समारोह सपा प्रमुख अखिलेश यादव की उपस्थिति में संपन्न हुआ। उनके साथ बीएसपी से जुड़े अनीस अहमद खान और अपना दल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एस. राज कुमार पाल ने भी समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली।
इस मौके पर अखिलेश यादव ने नए साथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह शामिल होना केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि विचारधारा का विस्तार है। उनके अनुसार इससे पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सामाजिक गठजोड़ को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने ऐलान किया कि पारंपरिक होली मिलन से पहले “पीडीए होली मिलन” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अखिलेश ने दोहराया कि जो भी समाज में वंचित, पीड़ित या उपेक्षित है, समाजवादी पार्टी और पीडीए उसके साथ खड़े हैं।
विपक्ष और सत्ता पक्ष पर तीखे प्रहार
अखिलेश यादव ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में नेता प्रतिपक्ष का लगातार अपमान किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग दूसरों से प्रमाण पत्र मांगते फिरते हैं, उन्हें पहले खुद अपनी प्रमाणिकता साबित करनी चाहिए। व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग ‘जेन जी सीएम’ का अर्थ ही बदलकर ‘करप्ट माउथ’ बताने लगे हैं।
नई व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सवाल
सपा अध्यक्ष ने कहा कि देश एक नए आर्थिक और राजनीतिक ढांचे की ओर बढ़ रहा है। विभिन्न देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए जा रहे हैं, और यदि कोई देश छूट गया हो तो उससे भी समझौता कर लेना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस बदलती व्यवस्था के बीच आम जनता की समस्याएं और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए।
राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भले ही खुद को अनुभवी खिलाड़ी मानते हों, लेकिन मैदान में प्रदर्शन संतोषजनक नहीं दिख रहा। उन्होंने जनसुनवाई कार्यक्रम में सांड के घुसने की घटना का जिक्र किया और हाल ही में पकड़े गए 370 किलो गांजा, फिल्म देखकर मॉडिफाई किए गए ट्रक और 10 करोड़ रुपये की बरामदगी जैसे मामलों पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि ये घटनाएं बताती हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां हैं और यह जानना जरूरी है कि आखिर ये सब किस दिशा में जा रहा था।
बसपा-सपा समीकरण पर संकेत
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि बहुजन समाज और समाजवादी विचारधारा के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पीडीए की एकजुटता आने वाले समय में और सशक्त रूप में सामने आएगी। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि जब से “फूल बाबू जी” उनके साथ आए हैं, कुछ लोगों के राजनीतिक फूल मुरझाने लगे हैं।
शंकराचार्य मुद्दे पर भी रखी बात
अखिलेश यादव ने धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूजनीय शंकराचार्य का भी अनादर करने से नहीं चूकते। उनका कहना था कि जो भी व्यक्ति अपमानित या आहत महसूस करता है, पीडीए उसके साथ खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय परंपरा में गेरुआ वस्त्र धारण करने वाले संतों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है और समाजवादी पार्टी भी उसी परंपरा का पालन करती है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में शामिल होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों से पहले सामाजिक और राजनीतिक गठजोड़ के विस्तार के रूप में देख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई साझेदारी प्रदेश की राजनीति में क्या असर डालती है।













