
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मेरठ स्थित लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में एसजीपीजीआई की तर्ज पर 100 बेड वाले अत्याधुनिक लेवल-वन ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह परियोजना क्षेत्र की आपात चिकित्सा सेवाओं को एक नई दिशा देने जा रही है।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद, सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को अब बाहर रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी ट्रॉमा सेंटर में विभिन्न यूनिटों के अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सक एक साथ उपलब्ध रहेंगे। यह ट्रॉमा सेंटर मार्च 2027 तक पूरी तरह बनकर तैयार होने की उम्मीद है।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं
नए ट्रॉमा सेंटर को अत्याधुनिक चिकित्सा संसाधनों से लैस किया जाएगा। यहां मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे और एमआरआई जैसी सुविधाएं एक ही भवन में उपलब्ध होंगी। नए डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति से इलाज की सुविधा 24 घंटे निर्बाध रूप से मिल सकेगी।
वर्तमान में प्रदेश में लेवल-वन ट्रॉमा सेंटर केवल एसजीपीजीआई लखनऊ में मौजूद है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे समेत कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जबकि गंगा एक्सप्रेसवे भी जल्द शुरू होने वाला है। बीते कुछ वर्षों में मेरठ और आसपास के इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बढ़ते हादसों ने बढ़ाई जरूरत
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से पहले मेरठ में सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष करीब 300 लोगों की मौत होती थी। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 350 से अधिक पहुंच गई। सड़क हादसों के मामलों में मेरठ प्रदेश के शीर्ष 20 जिलों में शामिल है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज को लेवल-वन ट्रॉमा सेंटर की सौगात दी है।
49 करोड़ की लागत से बनेगा चार मंजिला भवन
जलनिगम की सी एंड डीएस मेरठ शाखा द्वारा इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इमरजेंसी और पोस्टमार्टम हाउस के बीच उपलब्ध भूमि पर फाउंडेशन का काम तेजी से चल रहा है। करीब 49 करोड़ रुपये की लागत से बेसमेंट सहित चार मंजिला ट्रॉमा सेंटर का भवन तैयार किया जाएगा। शासन की ओर से पहली किस्त के रूप में 16.85 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
गोल्डन आवर में मिलेगा जीवनरक्षक उपचार
ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने से गंभीर रूप से घायल मरीजों को दुर्घटना के बाद के सबसे महत्वपूर्ण समय यानी “गोल्डन आवर” में तत्काल इलाज मिल सकेगा। इससे कई जिंदगियों को बचाया जा सकेगा। मरीजों की स्थिति के अनुसार उन्हें रेड, येलो और ग्रीन जोन में भर्ती किया जाएगा और उसी के अनुरूप उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
रेड जोन में अत्यधिक गंभीर और इमरजेंसी केस रखे जाएंगे। फिलहाल समुचित ट्रॉमा सुविधा न होने के कारण इस तरह की वर्गीकृत व्यवस्था संभव नहीं हो पाती है। सड़क दुर्घटनाओं में अत्यधिक रक्तस्राव, सिर में गंभीर चोट, चेहरे या जबड़े की हड्डियां टूटने और नसें फटने जैसे मामलों में पहले घंटे में इलाज न मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है।
50 नए विशेषज्ञ डॉक्टर, 24 घंटे तैनाती
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में लेवल-वन ट्रॉमा सेंटर अभी एसजीपीजीआई लखनऊ में है और इसके बाद मेरठ दूसरा केंद्र होगा। यहां हड्डी रोग, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और जनरल सर्जरी की चार यूनिटों के विशेषज्ञ डॉक्टर चौबीसों घंटे मौजूद रहेंगे।
ट्रॉमा सेंटर के लिए कुल 50 डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें 20 सीनियर डॉक्टर, 15 सीनियर रेजिडेंट और 15 जूनियर रेजिडेंट शामिल होंगे। इसके अलावा पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के लिए करीब 256 नए पद भी सृजित किए जाएंगे।
क्रिटिकल केयर यूनिट और इमरजेंसी से होगा सीधा कनेक्शन
100 बेड के ट्रॉमा सेंटर को पैदल पुल के माध्यम से पास में बन रही 100 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट और इमरजेंसी विभाग से जोड़ा जाएगा। ट्रॉमा सेंटर में प्रारंभिक इलाज के बाद मरीजों और घायलों को सीधे इन यूनिटों में शिफ्ट किया जा सकेगा, जिससे उपचार की प्रक्रिया और अधिक तेज हो जाएगी।
ऐसा होगा ट्रॉमा सेंटर का ढांचा
बेसमेंट: कार पार्किंग की सुविधा, जहां एक साथ 26 वाहन खड़े किए जा सकेंगे। इसके साथ स्टोर रूम और इलेक्ट्रिकल रूम भी होंगे।
ग्राउंड फ्लोर: रेड, येलो और ग्रीन जोन की व्यवस्था। रेड और येलो जोन में 8-8 बेड, जबकि ग्रीन जोन में 20 बेड होंगे।
प्रथम तल: चार मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, साथ ही प्री और पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड, जिनमें प्रत्येक में 5-5 बेड होंगे।
द्वितीय तल: 30 बेड का जनरल वार्ड और डॉक्टरों के ड्यूटी रूम।
तृतीय तल: 40 बेड का जनरल वार्ड और ड्यूटी रूम।
लिफ्ट सुविधा: 20-20 लोगों की क्षमता वाली तीन आधुनिक लिफ्ट लगाई जाएंगी।














