
संसद भवन के समीप स्थित एक मस्जिद में समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के बिना सिर ढके प्रवेश करने पर दिए गए बयान को लेकर मौलाना साजिद रशीदी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। यह मामला तब और गरमा गया जब सांसद इकरा हसन ने इस बयान की आलोचना करते हुए मौलाना के सामाजिक बहिष्कार की मांग की। साथ ही लखनऊ के गोमती नगर में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता ने मौलाना के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मौलाना साजिद रशीदी अपने बयान से पीछे हटने के बजाय और मुखर हो गए हैं। उनका कहना है, "मुझे इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि मैं मुसलमान हूं। मुझे जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। लेकिन मैंने जो कहा, वो धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप था।"
"मौलिक अधिकारों की बात कर रहा हूं, न कि नफरत की"
मौलाना ने अपने बयान को संविधानसम्मत करार देते हुए कहा, "हमारे संविधान में हर धर्म को अपने रीति-रिवाज़ मानने की स्वतंत्रता दी गई है। अगर कोई धार्मिक स्थल के सम्मान को ठेस पहुँचाता है, तो उस पर सवाल उठाना मेरा हक है। मैंने सिर्फ इतना कहा कि मस्जिद में जाते वक्त सिर ढकना चाहिए।"
उन्होंने विवादास्पद शब्द “नंगा” के प्रयोग पर सफाई दी और कहा कि "यह शब्द सामाजिक बोलचाल में आम है। यह अश्लीलता का प्रतीक नहीं है बल्कि कपड़ों के अभाव की ओर संकेत करता है। जैसे समाज में कहा जाता है कि कोई लड़की छोटे कपड़े पहन रही हो तो उसे नंगी कहा जाता है। मैंने बस यही कहा कि सांसद डिंपल यादव को मस्जिद में बैठते समय खुद को ढकना चाहिए था। यह सिर्फ इस्लामिक आस्था को आहत करने की कोशिश थी।"
"यह वोट की राजनीति है, लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे"
मौलाना ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण के पीछे सियासी साजिश है। उनका कहना है, "यह दिखाने की कोशिश है कि मुसलमानों का वोट लेकर सत्ता हासिल तो की जा सकती है, लेकिन उनकी आस्थाओं की कद्र नहीं की जाएगी। मस्जिद में बैठक कर ये जताना चाहते हैं कि मुस्लिम समुदाय को सिर्फ चुनावी मोहरा समझा जाता है।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि, "जब मैंने अपनी बात रखी, तो मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। लेकिन जब दूसरे धर्म के संत विवादास्पद बयान देते हैं, तो उन्हें कुछ नहीं कहा जाता। मेरे परिवार को धमकियाँ दी जा रही हैं, मेरी बच्ची तक को निशाना बनाया जा रहा है। ये सब सुनियोजित साजिश है, जिसमें अखिलेश यादव का हाथ हो सकता है।"
"मैं धर्म का प्रतिनिधि हूं, और धर्म की बात करना मेरा दायित्व है"
अपने ऊपर लगाए जा रहे तमाम आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना ने कहा, "मैं इस्लाम का सेवक हूं और मस्जिदों से जुड़े मुद्दों पर बोलना मेरा फर्ज है। मेरी बात कोई नफरत नहीं, बल्कि समाज को सच दिखाने की कोशिश थी।"
उन्होंने यह भी कहा कि, "मेरे बयान से कहीं ज्यादा गंभीर घटनाएं पहले हो चुकी हैं, लेकिन तब न तो मीडिया ने इतना ध्यान दिया, न ही किसी नेता ने आवाज उठाई। मैंने तो केवल सच का आईना दिखाया है।"














