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लखनऊ अग्निकांड का दर्द: कानपुर के दो जिगरी दोस्तों की मौत, एक का परिवार कर रहा था इंतजार, दूसरे की मां को नहीं दी गई मौत की खबर

लखनऊ अग्निकांड में कानपुर के दो जिगरी दोस्तों संयम विज और सूरजभान सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। एक परिवार बेटे के घर आने का इंतजार कर रहा था, जबकि दूसरे परिवार ने मां की तबीयत को देखते हुए अब तक बेटे की मौत की खबर छिपा रखी है। हादसे ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 23 Jun 2026 8:13:57

लखनऊ अग्निकांड का दर्द: कानपुर के दो जिगरी दोस्तों की मौत, एक का परिवार कर रहा था इंतजार, दूसरे की मां को नहीं दी गई मौत की खबर

लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में कानपुर के दो युवा दोस्तों की भी जान चली गई, जिससे उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतकों में 28 वर्षीय संयम विज और 25 वर्षीय सूरजभान सिंह शामिल हैं, जो लखनऊ में एक ही एनीमेशन स्टूडियो में कार्यरत थे। दोनों न सिर्फ सहकर्मी थे, बल्कि वर्षों पुरानी गहरी दोस्ती भी साझा करते थे। जैसे ही उनके निधन की सूचना कानपुर पहुंची, दोनों परिवारों में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

दादी की तेहरवीं में शामिल होने की थी तैयारी

संयम विज कानपुर के गोविंद नगर क्षेत्र के ब्लॉक-11 के निवासी थे। उनके परिवार में पहले से ही शोक का माहौल बना हुआ था। करीब दस दिन पहले उनकी दादी का निधन हुआ था और मंगलवार को उनका तेहरवीं संस्कार आयोजित होना था। परिवार के सदस्य संयम के घर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि उसे भी इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना था।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। तेहरवीं में शामिल होने के लिए घर लौटने से पहले ही उसके निधन की खबर परिवार तक पहुंच गई। इस खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जिन लोगों को बेटे के घर आने का इंतजार था, उन्हें अब उसके अंतिम दर्शन की तैयारी करनी पड़ रही है।

पिता के बाद परिवार की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहा था संयम

परिजनों के मुताबिक संयम अपने परिवार का बेहद जिम्मेदार सदस्य था। उसके पिता पुष्पराज विज का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। पिता के जाने के बाद परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन संयम ने नौकरी कर परिवार को संभालने का प्रयास किया।

उसका बड़ा भाई शुभम गुरुग्राम में कार्यरत है। हादसे की सूचना मिलते ही वह अपनी पत्नी के साथ तुरंत कानपुर के लिए रवाना हो गया। परिवार के लोगों का कहना है कि संयम ने कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारियों को समझ लिया था और वह हमेशा परिवार के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश में लगा रहता था।

खुशमिजाज स्वभाव ने बनाया था सबका चहेता

संयम को जानने वाले लोग बताते हैं कि वह बेहद मिलनसार और हंसमुख स्वभाव का युवक था। वह अपने व्यवहार से हर किसी का दिल जीत लेता था। नौकरी में भी उसका प्रदर्शन अच्छा था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं।

परिजन उसकी शादी की तैयारियों में भी जुटे हुए थे। घर में उसके लिए रिश्ते देखे जा रहे थे और भविष्य को लेकर कई योजनाएं बनाई जा रही थीं। लेकिन इस हादसे ने उन सभी सपनों को एक झटके में खत्म कर दिया। अब परिवार के पास केवल उसकी यादें ही बची हैं।

सूरजभान की मौत से भी टूट गया परिवार

दूसरे मृतक युवक सूरजभान सिंह कानपुर के बर्रा-सात इलाके के निवासी थे। उनकी असमय मौत ने भी परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है। सूरजभान के पिता का पहले ही निधन हो चुका था और परिवार में उनकी मां मीरा देवी तथा छोटा भाई सम्राट हैं।

परिवार के लिए सूरजभान ही सबसे बड़ा सहारा था। वह लखनऊ में नौकरी करता था और हर सप्ताहांत अपने घर कानपुर लौटता था। रविवार को भी वह रोज की तरह काम पर वापस गया था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।

मां को अब तक नहीं बताई गई बेटे की मौत

सूरजभान के भतीजे करन ने बताया कि हादसे की खबर मिलने के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया है। सबसे ज्यादा चिंता उनकी मां मीरा देवी की है। परिवार के लोगों ने अभी तक उन्हें बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी है।

परिजनों को डर है कि अचानक इतनी बड़ी दुखद खबर सुनकर उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ सकती है। इसलिए परिवार के सदस्य लगातार उन्हें संभालने और सामान्य बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। घर के भीतर हर कोई दुख में डूबा है, लेकिन मां के सामने खुद को मजबूत दिखाने की मजबूरी भी है।

दोस्ती की मिसाल थे दोनों युवक

संयम और सूरजभान की दोस्ती इलाके में भी चर्चा का विषय रहती थी। दोनों ने लंबे समय तक साथ काम किया और एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहे। उनके दोस्त और पड़ोसी बताते हैं कि दोनों युवकों का स्वभाव मददगार था और वे जरूरत पड़ने पर किसी की भी सहायता करने से पीछे नहीं हटते थे।

साथ पढ़ाई, साथ नौकरी और फिर एक ही हादसे में दोनों दोस्तों का दुनिया से चले जाना हर किसी को भावुक कर रहा है। उनके परिचितों का कहना है कि शायद ही किसी ने सोचा होगा कि जीवनभर साथ रहने वाले ये दोस्त आखिरी सफर भी साथ ही तय करेंगे।

आग लगते ही फंस गए थे कर्मचारी

परिजनों के अनुसार हादसे के वक्त दोनों युवक उसी कार्यालय में मौजूद थे, जहां अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। धुएं का गुबार तेजी से फैलने लगा और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका।

स्थिति इतनी भयावह हो गई कि कई लोग भवन के अंदर ही फंस गए। दम घुटने और धुएं के प्रभाव के कारण कई कर्मचारियों की जान चली गई। इसी हादसे में संयम और सूरजभान भी काल का ग्रास बन गए।

सेंसर आधारित गेट समय पर नहीं खुलने का आरोप

संयम के मामा सौरभ दुआ ने बताया कि जिस भवन में उनका भांजा काम करता था, वहां आने-जाने के लिए सेंसर आधारित गेट लगाए गए थे। आग लगने के बाद तकनीकी प्रणाली प्रभावित हो गई, जिससे गेट समय पर नहीं खुल सके।

उन्होंने दावा किया कि अंदर मौजूद कर्मचारी बाहर निकलने के लिए संघर्ष करते रहे, लेकिन धुएं और आग के बढ़ते प्रभाव के कारण हालात लगातार बिगड़ते चले गए। उनका मानना है कि यदि आपात स्थिति में निकास व्यवस्था बेहतर होती तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

शवों के इंतजार में परिजन, पूरे इलाके में शोक

हादसे की सूचना मिलते ही कानपुर से बड़ी संख्या में रिश्तेदार, मित्र और परिचित लखनऊ के लिए रवाना हो गए। सभी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने और शवों के घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।

जिन घरों में कुछ दिन पहले तक शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों की चर्चाएं हो रही थीं, वहां अब अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। एक ओर संयम के घर दादी की तेहरवीं की तैयारी थी, वहीं अब उसी परिवार को बेटे की अंतिम यात्रा की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इस दृश्य ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।

मंगलवार को दोनों युवकों के शव कानपुर पहुंचने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस हृदयविदारक हादसे ने न केवल दो परिवारों से उनके जवान बेटे छीन लिए हैं, बल्कि पूरे शहर को शोक और संवेदना के माहौल में डुबो दिया है। आज हर आंख नम है और हर कोई यही सोच रहा है कि काश यह हादसा टल जाता।

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