
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक उत्साह से भर उठा। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में पहुंचे श्रद्धालुओं और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने गीता की सार्वभौमिक शिक्षाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।
गीता के 700 श्लोक—हर सनातनी के जीवन का मार्गदर्शक
सीएम योगी ने कहा कि जब हम ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ का उल्लेख करते हैं, तो हमारे सामने श्रीमद् भगवद् गीता के वे 700 पवित्र श्लोक उभरकर आते हैं, जिन्हें हर सनातन धर्मावलंबी अपने जीवन का आधार मानता है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज इन श्लोकों को केवल पढ़ता नहीं है, बल्कि गहरे आस्था भाव और अनुशासन के साथ अपने जीवन में उतारने का प्रयास करता है।
उन्होंने आगे कहा कि गीता केवल एक धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि धर्म की सच्ची प्रेरक शक्ति और जीवन जीने की संपूर्ण कला है। भारत ने अपने पूरे इतिहास में कभी किसी पर अपने विचार थोपने का प्रयास नहीं किया। बल्कि दुनिया को “जियो और जीने दो” का अमूल्य सिद्धांत प्रदान किया है।
योगी का संबोधन—धर्म, प्रेरणा और भारत की मूल भावना
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सीएम योगी ने कहा कि 18 अध्यायों और 700 श्लोकों वाली गीता सदैव सभी सनातन अनुयायियों को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा प्रदान करती है। उन्होंने दोहराया कि गीता की शिक्षाएं धर्म की वास्तविक प्रेरणा हैं, और भारत ने कभी अपने सत्य को ही अंतिम सत्य करार कर घमंड नहीं किया।
योगी ने कहा कि हजारों वर्षों की समृद्ध परंपराओं और ज्ञान होने के बावजूद भारत ने कभी स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ नहीं मचाई। “हमारी भूमि ने हमेशा जीवन का सम्मान करना सिखाया है,” उन्होंने कहा। भारत की पावन धरती को उन्होंने ‘धर्मक्षेत्र’ बताया, जहां युद्ध भी धर्म और न्याय के मार्ग को स्पष्ट करने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा—“जहां धर्म है, वहीं विजय है; जहां अधर्म है, वहां विजयी होना असंभव है।”
RSS पर बोले योगी—'सेवा ही संगठन की पहचान'
कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि RSS बिना किसी जातिगत भेदभाव के समाज के हर वर्ग की सेवा में समर्पित है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि RSS को किसी विदेशी संस्था या अंतरराष्ट्रीय चर्च से धन नहीं मिलता।
उन्होंने आगे कहा कि संघ ने सौ वर्षों से बिना किसी स्वार्थ या सौदेबाजी के राष्ट्रहित में सेवा की है। योगी आदित्यनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि देश में कुछ लोग सेवा के नाम पर सौदे कर रहे हैं और भारत की जनसांख्यिकीय संरचना को बदलने की कोशिश में लगे हैं।














