
NEET UG-2026 परीक्षा को लेकर देशभर में उठे विवाद के बीच राजस्थान एसओजी की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं। जांच एजेंसियों को अब तक मिले संकेत यह बता रहे हैं कि कथित पेपर लीक नेटवर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार केरल, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हुए तथाकथित “गेस पेपर” को लेकर जांच कई दिशाओं में आगे बढ़ रही है।
राजस्थान एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि परीक्षा से पहले कुछ व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक कथित “गेस पेपर” तेजी से वायरल हुआ था। शुरुआती जांच में पाया गया कि उस दस्तावेज में मौजूद कई सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे। इसी आधार पर अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पेपर आखिर तैयार कहां हुआ और इसे सबसे पहले किसने साझा किया।
जांच में सामने आया है कि इस कथित गेस पेपर का शुरुआती लिंक केरल से जुड़ता दिखाई दे रहा है। जानकारी के मुताबिक, केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने यह पेपर सीकर में रहने वाले अपने पिता को भेजा था। छात्र के पिता सीकर में पीजी हॉस्टल संचालित करते हैं। बताया जा रहा है कि वहीं से यह दस्तावेज अन्य छात्रों, करियर काउंसलर्स और कुछ कोचिंग नेटवर्क तक पहुंचा और धीरे-धीरे कई अभ्यर्थियों के बीच फैल गया।
दिलचस्प बात यह है कि परीक्षा वाले दिन ही कुछ छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा से पहले वायरल हुए गेस पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र में कई सवाल समान दिखाई दे रहे हैं। हालांकि शुरुआती स्तर पर इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में जब छात्रों ने स्क्रीनशॉट और अन्य सबूतों के साथ NTA को ईमेल भेजा, तब जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और मामले ने तूल पकड़ लिया। शुरुआती दौर में स्थानीय एनटीए समन्वयक ने किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया था।
इस पूरे मामले में हॉस्टल संचालक का बयान भी काफी अहम माना जा रहा है। उसने जांच अधिकारियों को बताया कि उसे शुरुआत में यह अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर हो सकता है। उसके अनुसार, रात में उसने खुद गेस पेपर को ध्यान से नहीं देखा और अगले दिन परीक्षा से पहले हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को दे दिया। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब चर्चा शुरू हुई, तब उसे संदेह हुआ। इसके बाद वह एक कोचिंग संस्थान के शिक्षक के पास पहुंचा, जहां गेस पेपर की तुलना असली प्रश्नपत्र से की गई। वहां कई सवाल समान पाए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
एसओजी के मुताबिक, यह कथित गेस पेपर परीक्षा से पहले बड़ी संख्या में छात्रों और विभिन्न ऑनलाइन ग्रुप्स तक पहुंच चुका था। अब जांच एजेंसियां सोशल मीडिया चैट, व्हाट्सएप ग्रुप्स, डिजिटल रिकॉर्ड और मोबाइल डेटा की गहन जांच कर रही हैं। जिस फोटोकॉपी दुकान से यह पेपर मिलने की बात सामने आई है, वहां से भी कई दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य जब्त किए गए हैं। संबंधित लोगों से लगातार पूछताछ जारी है।
जांच में जयपुर निवासी मनीष और सीकर के राकेश को इस नेटवर्क के अहम किरदारों में माना जा रहा है। इन दोनों के कनेक्शन और गतिविधियों को खंगालने के लिए एसओजी की टीमें राजस्थान के कोचिंग हब सीकर के अलावा उत्तराखंड के देहरादून तक पहुंच चुकी हैं। कई जगहों पर छापेमारी और फील्ड पूछताछ की गई है ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें। इसके बावजूद अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कथित पेपर लीक की शुरुआत वास्तव में कहां से हुई थी।
जांच एजेंसियों का शक अब प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अंदरूनी लोगों पर भी गहराता जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि प्रश्नपत्र से जुड़े संवेदनशील डेटा तक पहुंच रखने वाले कुछ लोगों ने कथित गेस पेपर तैयार करने और उसे बाहर पहुंचाने में भूमिका निभाई हो सकती है। इसी एंगल को ध्यान में रखते हुए अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।
फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गेस पेपर तैयार करने वाला असली मास्टरमाइंड कौन था, यह सबसे पहले किन लोगों तक पहुंचा और कितने छात्रों को इसका फायदा मिला। आने वाले दिनों में जांच में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














