
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत, संन्यासी और सनातन परंपरा को लेकर सख्त और स्पष्ट रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि संन्यासी और संत का जीवन पूरी तरह धर्म के प्रति समर्पित होता है और उनके लिए धर्म से बढ़कर कुछ भी नहीं है। संन्यासी के पास न तो निजी संपत्ति होती है और न ही व्यक्तिगत स्वार्थ—राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान और पहचान होता है। मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि धर्म की आड़ लेकर सनातन परंपरा को कमजोर करने की साजिशें हो रही हैं और कुछ ‘कालनेमि’ तत्व जानबूझकर सनातन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।
राम मंदिर से माघ मेले तक, योगी ने दिए उदाहरण
गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अयोध्या और प्रयागराज का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कभी राम मंदिर का निर्माण एक सपना माना जाता था, लेकिन मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और सुशासन के कारण आज अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर खड़ा है और वहां उनकी पताका लहरा रही है।
प्रयागराज के माघ मेले का उदाहरण देते हुए सीएम योगी ने कहा कि मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर करीब साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने कहा, “मौनी अमावस्या पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं का स्नान करना कोई सामान्य घटना नहीं है। दुनिया के कई देशों की आबादी इतनी भी नहीं है। यह संतों की साधना, भारत की परंपरा और सशक्त राजनीतिक नेतृत्व का परिणाम है। यह सब केवल भारत में ही संभव है। आने वाले एक हजार वर्षों तक भारत और सनातन का डंका बजना चाहिए।”
युवाओं से जुड़ा देश का भविष्य
मुख्यमंत्री योगी ने अपने भाषण में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के भविष्य का आकलन वहां के युवाओं को देखकर किया जा सकता है। “अगर युवाओं के मन में देश और समाज के लिए कुछ करने का जज़्बा है, तो उस देश का भविष्य उज्ज्वल है। लेकिन जहां युवा निराश और हताश हो जाए, वहां प्रगति की कोई संभावना नहीं रहती। किसी को भी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है,” उन्होंने कहा।














