
वृंदावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों और व्यवस्थापकों के लिए एक नया नियम लागू होने जा रहा है। उच्चाधिकार प्रबंधन समिति की सोमवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब नए साल से श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिदिन ठाकुर बांकेबिहारी को अर्पित किया जाएगा। प्रतिदिन चार पहर के भोग का जिम्मा भक्तों को सौंपा जाएगा, जिससे भक्त भोग सेवा में हिस्सा ले सकेंगे और भोग व्यवस्था भी सुव्यवस्थित रहेगी।
हालांकि मंदिर के हलवाई को नियमित भुगतान जारी रहेगा। फिलहाल आइआइटी रुड़की की टीम की रिपोर्ट पूरी न होने के कारण मंदिर में रेलिंग व्यवस्था पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। 15 फरवरी से मंदिर में ठाकुरजी के दर्शनों का लाइव प्रसारण भी शुरू होगा, जिसके लिए मंदिर के अंदर और बाहर एलईडी लगाई जाएंगी।
उच्चाधिकार प्रबंधन समिति का निर्णय
शहीद लक्ष्मण सिंब भवन स्थित समिति कार्यालय में हुई बैठक में ठाकुरजी को देरी से अर्पित होने वाले बालभोग का मुद्दा चर्चा में आया। समिति अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार ने कहा कि एक जनवरी से श्रद्धालुओं द्वारा प्रायोजित भोग ही सुबह से शाम तक ठाकुरजी को अर्पित किया जाएगा। अनुमानित लगभग एक लाख रुपये की राशि श्रद्धालुओं को भोग प्रायोजित करने के लिए भुगतान करनी होगी। 24 दिसंबर को होने वाली अगली समिति बैठक में धनराशि पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
भोग पर मासिक खर्च और अनियमितताएं
अध्यक्ष ने बैठक में बताया कि भोग पर हर माह लगभग सात लाख रुपये का खर्च आता है। मंदिर कोष से भोग पर कई बार अनियमितताएं भी सामने आई हैं। वर्ष 2017 में एक वर्ष तक भोग पर कोई खर्च नहीं हुआ। कोविड काल में मंदिर बंद रहने पर सामान्य दिनों से अधिक खर्च हुआ। सीए की रिपोर्ट में पिछले दो दशकों में सेवायतों द्वारा अनियमितताओं और न्यायालय के आदेश न मानने पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया, जो अभी तक वसूल नहीं हो पाया।
रेलिंग व्यवस्था के लिए आइआइटी रुड़की की टीम ने सर्वे किया था, लेकिन रिपोर्ट न आने के कारण अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया। 15 फरवरी से मंदिर में दर्शन की लाइव स्ट्रीमिंग सुयोग्य मीडिया को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
सेवायत परिवारों की पेंशन पर समीक्षा
बैठक में वृद्धावस्था, विधवा पेंशन और बच्चों की शिक्षा के लिए दी जाने वाली छात्रवृत्ति पर भी चर्चा हुई। आडीटर वाईके गुप्ता एंड कंपनी ने इसमें अनियमितताओं का आरोप लगाया और इसे व्यर्थ खर्च बताया। सेवायत सदस्यों ने इसे पारंपरिक अधिकार बताते हुए लागू रखने की बात कही। मंदिर की सुरक्षा एजेंसी की सेवाओं की समीक्षा भी बैठक में हुई।
कोटा में मंदिर की भूमि अधिग्रहण
मंदिर की राजस्थान के कोटा में 90-100 बीघा भूमि है, जिसके अभिलेख प्रबंधन के पास नहीं हैं। भूमि अधिग्रहण और अभिलेख प्राप्त करने के लिए उपजिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व पंकज वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। यह टीम राजस्थान जाकर भूमि संबंधी दस्तावेज़ संकलित करेगी और क्षेत्र में कार्रवाई करेगी।
बैठक में उपस्थित प्रमुख सदस्य
सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश मिश्रा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार, डीएम व सचिव चंद्रप्रकाश सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार, विप्रा उपाध्यक्ष श्याम बहादुर सिंह, पुरातत्वविद् डा. स्मिता एस कुमार, एडीएम फाइनेंस पंकज वर्मा, गोस्वामी सदस्य शैलेंद्र गोस्वामी, श्रीवर्धन गोस्वामी, दिनेश कुमार गोस्वामी और विजय कृष्ण गोस्वामी बैठक में मौजूद रहे।














