
भगवान श्रीराम को लेकर तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा की टिप्पणी के बाद अयोध्या में साधु-संतों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। संत समाज ने इस बयान को आस्था पर सीधा प्रहार बताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अयोध्या के प्रमुख संतों का कहना है कि सनातन परंपरा और भगवान राम के अस्तित्व को लेकर इस तरह की बयानबाजी न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने वाली भी है। इस पूरे विवाद से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें विधायक को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि भगवान राम मुसलमान थे।
अयोध्या से सीताराम दास महाराज ने इस बयान को अत्यंत निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी यह दर्शाती है कि बयान देने वाले व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। महाराज के अनुसार, भगवान राम सनातन संस्कृति की आत्मा हैं और उनके अस्तित्व को किसी भी राजनीतिक या वैचारिक चश्मे से देखना आस्था का अपमान है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को अपनी मानसिक स्थिति की जांच करानी चाहिए और यदि वे स्वयं ऐसा नहीं करते, तो समाज उन्हें उचित उत्तर देना जानता है।
सीताराम दास महाराज ने आगे केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले इस तरह के बयानों पर सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि ऐसे मामलों में राष्ट्रद्रोह जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई हो और दोषी की संपत्ति जब्त कर उसकी नीलामी की जाए। उनके मुताबिक, भगवान राम और सनातन धर्म के खिलाफ किसी भी प्रकार की टिप्पणी को सहन नहीं किया जा सकता।
वहीं, करपात्री महाराज ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भगवान राम किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरी मानवता के लिए आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि राम को किसी विशेष धर्म से जोड़कर देखना गलत सोच को दर्शाता है। करपात्री महाराज ने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा और बयान सार्वजनिक जीवन में स्वीकार्य नहीं हैं और इन्हें लेकर गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है।
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने भी टीएमसी विधायक के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच यह दर्शाती है कि कुछ लोग भारत में रहकर भी देश की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान नहीं करते। उनके अनुसार, भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं और उनके अस्तित्व पर सवाल उठाना सनातन धर्म और समाज दोनों का अपमान है। उन्होंने कहा कि राम केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक पात्र नहीं, बल्कि जीवन और चेतना का आधार हैं।
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने बयान को परम ब्रह्म और भगवान राम के प्रति अभद्र करार देते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां समाज में तनाव पैदा करती हैं और इन्हें किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। संतों का मानना है कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक विषयों को उछालना बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है।
अयोध्या के संत समाज ने एक सुर में कहा कि भगवान राम को लेकर की गई इस टिप्पणी ने करोड़ों सनातनियों की भावनाओं को आहत किया है। संतों ने स्पष्ट किया कि आस्था और विश्वास से जुड़े विषयों पर बयान देने से पहले नेताओं को संयम और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए, ताकि समाज में शांति और सद्भाव बना रहे।














