
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के “वोट चोरी” वाले आरोपों को न सिर्फ समर्थन दिया, बल्कि इसे उससे भी बड़ा अपराध बताते हुए टिप्पणी की। बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी आम चोरी जैसा मामूली मामला नहीं है, बल्कि यह खुली डकैती की तरह हुआ है। अखिलेश के शब्दों में, “यह चोरी नहीं है, चोरी तो छोटे स्तर पर होती है... यह तो डकैती है और वह भी सबके सामने।”
राहुल गांधी ने कलबुर्गी के अलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों के हजारों वैध वोटों को हटाने की कोशिश की गई। इसी संदर्भ में अखिलेश यादव बेंगलुरु पहुंचे थे, जहां वे ‘विजन इंडिया: स्टार्टअप समिट’ में शामिल हुए।
बिहार चुनाव परिणाम पर अखिलेश की प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने बूथ स्तर के आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन अभी नहीं किया है, लेकिन नतीजों पर उनकी नजर है। उन्होंने तेजस्वी यादव की लोकप्रियता की तारीफ करते हुए कहा कि वे बिहार में एक मजबूत और आकर्षक चेहरा बनकर उभरे हैं।
अखिलेश ने यह भी कहा कि महागठबंधन पूरे चुनाव के दौरान सकारात्मक राजनीति पर केंद्रित रहा, जबकि एनडीए की ओर से “विभाजनकारी एजेंडा” चलाया गया। उत्तर प्रदेश सरकार पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार का सहारा सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी सरकार होने के बावजूद जनहित के मुद्दों पर वास्तविक काम नहीं हुआ।
लालू परिवार के विवाद पर अखिलेश की राय
लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रहे विवाद पर भी अखिलेश यादव से सवाल पूछा गया। हाल ही में लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर पारिवारिक तनाव के कई मुद्दे उठाए, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।
इस पर अखिलेश ने कहा कि उनके अपने परिवार में अगर कोई मसला उठता है तो लोग उस पर तुरंत बहस शुरू कर देते हैं, लेकिन बीजेपी नेताओं के परिवारों में होने वाली तकरार पर कोई सवाल नहीं उठाता। उन्होंने कहा कि लालू परिवार के भीतर जो भी हो रहा है, वह उनका निजी मामला है और लगभग हर घर में ऐसी स्थितियां सामने आती रहती हैं।
अखिलेश ने मौजूदा राजनीतिक वातावरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश एक तरह के “अनौपचारिक आपातकाल” से गुजर रहा है। उनके अनुसार, भारत की पहचान उसकी विविधता है, लेकिन अब एक ही विचारधारा लोगों पर थोपी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह हालात लोगों को अपने घरों में भी राजनीतिक चर्चाओं पर मजबूर कर रहे हैं। “यह सरकार हिंदुस्तान की मूल भावना—हिंदुस्तानियत—को नुकसान पहुंचा रही है,” सपा प्रमुख ने जोड़ा।














