
प्रतापगढ़ पुलिस ने नशे के कारोबार पर एक और बड़ा प्रहार किया है। मंगलवार को आसपुर देवसरा थाना पुलिस ने अमुवाही मोड़ के पास चेकिंग के दौरान बिना नंबर प्लेट की बोलेरो को रोका। तलाशी लेने पर गाड़ी से ढाई किलो गांजा, 91,600 रुपये नकद और एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा बरामद हुआ।
पकड़े गए दोनों तस्करों की पहचान जय सिंह उर्फ गुड्डू निवासी सपहा छात पट्टी और संजय शुक्ला निवासी सैफाबाद के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों लंबे समय से गांजे की सप्लाई का नेटवर्क चला रहे थे। इनमें जय सिंह के खिलाफ सात और संजय के खिलाफ तीन मुकदमे पहले से दर्ज हैं। दोनों बिहार और ओडिशा से नशीले पदार्थ मंगवाकर यूपी के कई जिलों में थोक में सप्लाई करते थे।
बोलेरो में था नशे का जाल, पुलिस ने खोला राज
पुलिस ने बताया कि जिस बोलेरो में गांजा मिला, उस पर नंबर प्लेट जानबूझकर नहीं लगाई गई थी। जांच में पता चला कि वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर UP70 BX 0590 है, जो जय सिंह के नाम पर दर्ज है। करीब दो साल पहले खरीदी गई यह बोलेरो हर बार बिहार या ओडिशा से माल लाने में इस्तेमाल होती थी।
पुलिस को जानकारी मिली कि जय सिंह बाहर राज्यों में जाते समय नंबर प्लेट लगा देता था, लेकिन अपने इलाके में प्रवेश करते ही उसे हटा देता था ताकि किसी को शक न हो। वह पिछले एक साल से इस अवैध धंधे में सक्रिय था और पुलिस की नजरों से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलता रहता था।
छोटी जमीन से शुरू किया धंधा, बना लिया घर नशे के पैसे से
जांच में यह भी सामने आया कि जय सिंह के पास महज दो बीघा जमीन है, लेकिन उसने नशे के पैसों से आलीशान घर बना लिया। गांव के लोग बताते हैं कि वह अक्सर घर से बाहर रहता था और उसके कामकाज के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी। जय सिंह खुद ही माल की खेप लाने और सप्लाई करने का काम करता था।
जौनपुर, रायबरेली और सुलतानपुर तक फैला नेटवर्क
पुलिस के अनुसार जय सिंह का तस्करी नेटवर्क प्रतापगढ़ से लेकर रायबरेली, सुलतानपुर और जौनपुर तक फैला हुआ था। वह थोक में गांजा बेचता था और उसके पास पहले से तय ग्राहक थे, जिससे उसे किसी अतिरिक्त मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती थी। पूरा कारोबार योजनाबद्ध तरीके से चलता था।
तस्करी का पुराना खिलाड़ी है जय सिंह
पुलिस रिकॉर्ड से पता चला कि जय सिंह पहली बार 2007 में गिरफ्तार हुआ था, जब वह कच्ची शराब बेचते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद उसने नशे के धंधे में पूरी तरह कदम रख दिया। 2007 के बाद 2008, 2009, 2014 और 2015 में उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कई मामले दर्ज हुए। 2016 में उस पर आर्म्स एक्ट, और अब एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई की गई है। वहीं, 42 वर्षीय संजय शुक्ला पर भी एनडीपीएस और आबकारी अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
पुलिस का सख्त संदेश — नशे के कारोबार पर नहीं होगी कोई रियायत
सीओ पट्टी मनोज कुमार सिंह रघुवंशी ने बताया कि दोनों तस्करों की पुलिस को लंबे समय से तलाश थी। ये थोक में गांजे की सप्लाई करते थे और अब पुलिस ने इन्हें दबोच लिया है। वहीं, एसपी दीपक भूकर ने कहा — “जनपद में नशे के किसी भी रूप की बिक्री या तस्करी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस लगातार ऐसे लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई कर रही है। उनका पूरा नेटवर्क तोड़ने के लिए अभियान जारी रहेगा।”














