तमिलनाडु में छात्रों और युवाओं को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने के लिए जारी किए गए एक आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। थलपति विजय की पार्टी TVK की ओर से जारी इस निर्देश का विरोध होने के बाद इसे वापस ले लिया गया है। आदेश में छात्रों को वामपंथी संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शनों व आंदोलनों में हिस्सा लेने से रोकने की बात कही गई थी।
आदेश सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने इसकी कड़ी आलोचना की। पार्टी की ओर से इसे विरोध के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताते हुए निंदनीय और असंवैधानिक करार दिया गया। बढ़ते विवाद के बीच अब TVK ने अपना कदम पीछे खींच लिया है।
छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने का था निर्देश
मामला स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ-साथ युवाओं से जुड़ा था। शिक्षा विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में राज्य के अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि छात्र और युवा CJP या वामपंथी संगठनों के बैनर तले आयोजित राजनीतिक प्रदर्शनों, आंदोलनों और हड़तालों में शामिल न हों।
इस निर्देश के तहत अधिकारियों से छात्रों को ऐसे कार्यक्रमों से दूर रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया था। आदेश सार्वजनिक होने के बाद इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आने लगी।
CJP ने किया कड़ा विरोध
TVK के इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से नाराजगी जाहिर की गई। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे निंदनीय और असंवैधानिक बताया।
सौरव दास ने कहा, “यह एक निंदनीय और असंवैधानिक आदेश है। किसी भी व्यक्ति को विरोध-प्रदर्शन करने से रोका नहीं जा सकता।”
CJP ने छात्रों और युवाओं को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने वाले इस निर्देश को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
विरोध के बाद वापस लिया गया आदेश
आदेश को लेकर विवाद बढ़ने के बाद TVK को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। इस तरह छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने वाला निर्देश अब वापस हो चुका है।
इस घटनाक्रम के बाद TVK का यह फैसला चर्चा में है। शुरुआत में छात्रों और युवाओं की राजनीतिक प्रदर्शनों में भागीदारी रोकने की कोशिश के तौर पर सामने आया आदेश विरोध का मुद्दा बन गया और बाद में पार्टी को इसे वापस लेना पड़ा।













