उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू किए जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे कई मुद्दों के बीच इस तरह के शुल्क का बढ़ना आम ग्राहकों और जनता पर असर डाल सकता है। संजय निषाद ने सवाल किया कि किन परिस्थितियों में यह शुल्क बढ़ाया गया है और कहा कि ऐसे चार्ज नहीं बढ़ाए जाने चाहिए।
संजय निषाद ने लोकतंत्र की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य लोगों का बोझ कम करना, उन्हें अधिक अवसर और सुविधाएं देना तथा यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। उनके मुताबिक लोकतंत्र को लोगों की मुश्किलों का समाधान करने का माध्यम होना चाहिए।
2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर MDR नहीं
नए UPI नियमों के मुताबिक 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये तक के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR नहीं लगेगा। वहीं, 2,000 रुपये से अधिक के ग्राहक से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी ग्राहक ने 3,000 रुपये की खरीदारी की, तो 0.4 प्रतिशत की दर से व्यापारी की ओर से जमाकर्ता बैंक को 12 रुपये का शुल्क देना होगा। यह कमीशन बैंकों समेत भुगतान व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग साझेदारों के बीच बांटा जाएगा।
P2P लेनदेन पर नहीं लगेगा शुल्क
नियमों में व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन को शुल्क से बाहर रखा गया है। लेनदेन की रकम कितनी भी हो, ऐसे भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के उच्च-मूल्य वाले भुगतान के मामले में MDR को अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन तक सीमित रखा गया है। यानी इस श्रेणी में शुल्क की ऊपरी सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
कुछ जरूरी क्षेत्रों और छोटे कारोबारियों के लिए अलग प्रावधान
दूरसंचार, बीमा और ईंधन जैसे आवश्यक क्षेत्रों के लिए प्रति लेनदेन पांच रुपये का एकमुश्त MDR निर्धारित किया गया है। इसके अलावा म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा। इस श्रेणी में भी प्रति लेनदेन अधिकतम शुल्क 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
छोटे व्यापारियों के लिए भी नियमों में अलग प्रावधान रखा गया है। प्रति माह एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए सभी लेनदेन पर अनिवार्य रूप से शून्य MDR की सुविधा होगी।
इसी शुल्क व्यवस्था को लेकर संजय निषाद ने आम जनता पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि लोगों को सुविधाएं देने और उनका बोझ कम करने की दिशा में काम होना चाहिए, न कि ऐसे शुल्क बढ़ाए जाने चाहिए जिनका असर ग्राहकों और आम जनता पर पड़ सकता है।
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