परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत में जारी राजनीतिक बहस के बीच अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। विजय की ओर से तमिलनाडु विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किए जाने की बात सामने आई है, जिसमें देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या को 543 पर ही बनाए रखने की मांग की गई है। प्रस्ताव में जनसंख्या नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले तमिलनाडु समेत दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व पर संभावित असर का मुद्दा उठाया गया है।
प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि जिन राज्यों ने राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को प्रभावी तरीके से अपनाया है, उन्हें केवल आबादी के आधार पर होने वाले परिसीमन से नुकसान नहीं होना चाहिए। इसके अनुसार, यदि लोकसभा सीटों का निर्धारण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो संसद में तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कमजोर पड़ सकता है।
लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर रखने की मांग
विजय की ओर से रखे गए प्रस्ताव में केंद्र के परिसीमन संबंधी प्लान के खिलाफ रुख जाहिर किया गया है। इसमें मांग की गई है कि देश में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या को हमेशा के लिए 543 पर ही स्थिर रखा जाए।
इस मुद्दे को दक्षिण भारतीय राज्यों के राजनीतिक और प्रतिनिधित्व संबंधी हितों से जोड़कर देखा गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाए हैं। ऐसे में केवल आबादी को आधार बनाकर लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी किए जाने से इन राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
महिला आरक्षण पर भी विजय का जोर
प्रस्ताव के दौरान विजय ने महिला आरक्षण को लेकर भी अपना रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर ही दिया जाना चाहिए।
विजय के मुताबिक महिला आरक्षण के क्रियान्वयन में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे केवल रियायत के तौर पर नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने तमिलनाडु में महिलाओं के मतदान को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि राज्य में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने अधिक मतदान किया है।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता
परिसीमन का मुद्दा दक्षिण भारत के राज्यों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय बना हुआ है। प्रस्ताव में इसी चिंता को प्रमुखता देते हुए कहा गया है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के दौरान अपने प्रतिनिधित्व की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।
विजय की ओर से रखे गए रुख में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बनाए रखने और महिला आरक्षण को इसी आधार पर लागू करने की मांग एक साथ सामने आई है। ऐसे में परिसीमन और संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है।














