
राजस्थान डीजे फर्स्ट टी ग्लोबल सीमेंट 2026 के दूसरे दिन सोमवार को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई अहम सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन्हीं सत्रों की श्रृंखला में आज पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महिलाओं की भूमिका, लीडरशिप और तकनीक के आपसी संबंध पर अपने विचार साझा किए। “लीडरशिप बियॉन्ड लेबल्स” नामक सेशन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई और टेक्नोलॉजी महिलाओं के सशक्तिकरण में किस तरह योगदान दे सकती हैं और किन चुनौतियों पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
एक नहीं, कई भूमिकाओं में आगे बढ़ती हैं महिलाएं
स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं को किसी एक पहचान या भूमिका में बांधकर नहीं देखा जा सकता। वे एक ही समय पर कई जिम्मेदारियां निभाती हैं—परिवार, करियर, समाज और नेतृत्व, हर मोर्चे पर उनकी सक्रिय भूमिका होती है। यही वजह है कि समाज की प्रगति में महिलाओं का योगदान बेहद अहम हो जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की यह मल्टीटास्किंग क्षमता उन्हें स्वाभाविक लीडर बनाती है, जिसे सही प्लेटफॉर्म और सहयोग मिलने की जरूरत है।
एआई और डेटा: महिलाओं के संदर्भ में बड़ी चुनौतियां
अपने संबोधन में स्मृति ईरानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के डेटा-आधारित स्वरूप पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एआई पूरी तरह डेटा पर निर्भर करता है, लेकिन यह डेटा हमेशा निष्पक्ष नहीं होता। खासतौर पर महिलाओं से जुड़े मामलों में डेटा में पहले से मौजूद कई खामियां और पूर्वाग्रह देखने को मिलते हैं। चाहे वह कार्यस्थल पर महिलाओं की प्रगति हो या उनके विचारों और क्षमताओं का मूल्यांकन—इन सबमें डेटा से जुड़ी बुनियादी समस्याएं सामने आती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम एआई के जरिए महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो इन छिपे हुए पूर्वाग्रहों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर डेटा ही पक्षपातपूर्ण होगा, तो एआई के फैसले भी समानता से दूर हो सकते हैं।
मोटर व्हीकल सेक्टर का उदाहरण देकर समझाया पक्षपात
स्मृति ईरानी ने अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए मोटर व्हीकल सेक्टर से जुड़ा एक अध्ययन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक रिसर्च में सामने आया है कि सड़क दुर्घटनाओं में महिलाओं के शारीरिक रूप से अधिक गंभीर रूप से घायल होने की संभावना करीब 44 प्रतिशत तक ज्यादा होती है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल को जांचने वाले एआई सिस्टम मूल रूप से पुरुष शरीर के डेटा पर आधारित होते हैं।
उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा उपकरणों का डिजाइन और परीक्षण पुरुष-केंद्रित डेटा से किया जाता है, तो महिलाओं की सुरक्षा अपने आप ही कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में अगर हम समानता की बात करते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि एआई को किस तरह के डेटा से प्रशिक्षित किया जा रहा है।
बिना पूर्वाग्रह के डेटा तैयार करना है जरूरी
अपने संबोधन के अंत में स्मृति ईरानी ने कहा कि अगर एआई को समाज के लिए एक सकारात्मक बदलाव का जरिया बनाना है, तो डेटा को निष्पक्ष और संतुलित तरीके से तैयार करना होगा। एआई के विकास से जुड़ी चर्चाओं में यह सवाल सबसे अहम होना चाहिए कि डेटा सेट में किसी तरह का पूर्वाग्रह न हो। उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्थान और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए एआई को संवेदनशील और समावेशी बनाना समय की मांग है।
स्मृति ईरानी के मुताबिक, अगर तकनीक और डेटा को सही दिशा में प्रशिक्षित किया जाए, तो एआई न सिर्फ महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है, बल्कि समाज को भी ज्यादा न्यायपूर्ण और संतुलित बना सकता है।














